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MoodiMe: Find your Feelings screenshot
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पक्ष

  • भावनाओं को पहचानने और व्यक्त करने में मदद करने वाला सरल इंटरफ़ेस
  • दैनिक मूड दर्ज करने से भावनात्मक पैटर्न समझना आसान होता है
  • मूड के आधार पर आत्मचिंतन और मानसिक स्वास्थ्य जागरूकता को बढ़ावा देता है
  • कम समय में भावनात्मक स्थिति लॉग की जा सकती है
  • व्यक्तिगत अनुभवों को व्यवस्थित रूप से ट्रैक करने के लिए उपयोगी

विपक्ष

  • ऐप की जानकारी मानसिक स्वास्थ्य विशेषज्ञ की सलाह का विकल्प नहीं है
  • नियमित रूप से लॉग न करने पर मूड ट्रैकिंग का लाभ कम हो सकता है
  • कुछ उपयोगकर्ताओं को भावनाओं की श्रेणियां सीमित लग सकती हैं
  • संवेदनशील भावनात्मक डेटा की गोपनीयता नीति ध्यान से पढ़नी चाहिए
  • गंभीर मानसिक संकट के लिए इसमें पर्याप्त पेशेवर सहायता उपलब्ध नहीं है
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बच्चों को अपनी भावनाओं के लिए सही शब्द ढूँढना हमेशा आसान नहीं होता। कभी वे चिड़चिड़े होते हैं, लेकिन बता नहीं पाते कि थकान है, निराशा है या किसी बात का डर। MoodiMe: Find your Feelings इसी शुरुआती भावनात्मक पहचान को खेल के रूप में समझाने की कोशिश करता है। मैंने इसे एक छोटे बच्चे के साथ इस्तेमाल करते हुए देखा कि इसका असली आकर्षण किसी कठिन चुनौती में नहीं, बल्कि बच्चे को रुककर अपने मन की स्थिति पर ध्यान देने के लिए प्रेरित करने में है।

यह Sunnymoon Project LTD का बच्चों के लिए सामाजिक-भावनात्मक सीखने वाला गेम है। इसे निःशुल्क शुरू किया जा सकता है, यह तीन वर्ष या उससे अधिक उम्र के बच्चों के लिए रेट किया गया है और शिक्षा देने वाले खेलों की श्रेणी में आता है। इसका मौजूदा संस्करण 3.4 है और इसे चलाने के लिए Android 7.0 या उसके बाद का संस्करण चाहिए। मेरे लिए इसकी सबसे उपयोगी बात यह है कि यह भावनाओं पर बातचीत शुरू करने का एक नरम तरीका देता है, न कि बच्चे से सीधे “तुम्हें कैसा लग रहा है?” पूछकर उसे असहज करता है।

पहली कार्रवाई: बच्चा भावना को पहचानने की कोशिश करता है

इस खेल का मुख्य अनुभव एक सरल चुनाव से शुरू होता है। बच्चे को किसी भावनात्मक स्थिति पर ध्यान देना होता है और फिर उसे समझने या पहचानने की कोशिश करनी होती है। यही पहली कार्रवाई महत्वपूर्ण है, क्योंकि बच्चा केवल स्क्रीन पर टैप नहीं कर रहा होता; वह अपने अनुभव को किसी चेहरे, स्थिति या भावनात्मक संकेत से जोड़ने का अभ्यास कर रहा होता है। छोटे बच्चों के लिए यह अमूर्त सीखने की तुलना में अधिक सहज रास्ता है।

मैंने पाया कि अभिभावक को शुरुआत में तुरंत उत्तर बताने के बजाय बच्चे से पहले अनुमान लगाने देना चाहिए। “तुम्हें क्या लगता है, यह कैसा महसूस कर रहा है?” जैसा छोटा सवाल खेल को एक साझा गतिविधि बना देता है। यदि बच्चा गलत विकल्प चुनता है, तो उसे असफलता की तरह पेश करने के बजाय उस चुनाव पर बात की जा सकती है। इस तरह खेल का उद्देश्य सही बटन दबाना भर नहीं रहता, बल्कि भावनाओं के बीच फर्क समझना बन जाता है।

यहाँ एक उपयोगी व्यावहारिक तरीका है: खेल शुरू करने से पहले बच्चे से उस दिन की एक घटना पूछें, जैसे खिलौना टूटना, किसी दोस्त से मिलना या सोने का समय। फिर खेल में दिखाई देने वाली भावना को उस घटना से जोड़ें। इससे स्क्रीन का अनुभव रोजमर्रा की जिंदगी से जुड़ता है और बच्चा केवल खेल के भीतर सीखे शब्दों को याद करने के बजाय उन्हें अपने संदर्भ में इस्तेमाल करना शुरू कर सकता है।

फिर भी, यह हर बच्चे के लिए समान रूप से आसान नहीं होगा। जो बच्चा अभी भावनाओं के नाम सीखना शुरू कर रहा है, उसे विकल्पों में अंतर समझने के लिए वयस्क की मदद चाहिए हो सकती है। कुछ बच्चे चित्र या खेल की गति से अधिक आकर्षित होंगे और भावना पर ध्यान कम देंगे। इसलिए मैं इसे पूरी तरह अकेले खेलने वाला अभ्यास नहीं मानता; छोटे बच्चों के मामले में यह अभिभावक और बच्चे के बीच बातचीत का सहारा बनकर अधिक अच्छा काम करता है।

सही उत्तर से अधिक महत्वपूर्ण है बातचीत

इस खेल का मूल्य उस क्षण में बढ़ता है जब अभिभावक उत्तर के बाद एक अतिरिक्त सवाल पूछता है। “क्या तुम्हें कभी ऐसा महसूस हुआ?” या “जब ऐसा होता है, तब तुम्हें किस चीज से मदद मिलती है?” जैसे सवाल बच्चे को पहचान से आगे ले जाते हैं। खेल भावनात्मक शब्दावली का दरवाजा खोलता है, लेकिन उस दरवाजे के पार बातचीत परिवार को करनी होती है।

मैं इसे खास तौर पर उन घरों के लिए उपयोगी मानता हूँ जहाँ बच्चा अपने दिन के बारे में बहुत कम बताता है। स्कूल से लौटने के बाद सीधे सवाल करने पर वह “कुछ नहीं” कह सकता है, लेकिन खेल के किसी भावनात्मक संकेत को देखकर अपने अनुभव से जुड़ी बात खुद निकाल सकता है। यह कोई चिकित्सकीय मूल्यांकन नहीं है और इसे वैसा समझना भी ठीक नहीं होगा; इसकी भूमिका शुरुआती पहचान और संवाद की है।

फीडबैक की लय: कार्रवाई के बाद तुरंत प्रतिक्रिया

बच्चों के खेल में प्रतिक्रिया का समय बहुत मायने रखता है। MoodiMe में चुनाव के बाद मिलने वाला फीडबैक बच्चे को यह समझने में मदद करता है कि उसकी कार्रवाई का कोई परिणाम हुआ है। यही लय—देखना, चुनना, प्रतिक्रिया पाना—अनुभव को पाठ या प्रश्नावली की तरह सूखा नहीं बनने देती। बच्चे को हर चरण में अगली छोटी कार्रवाई का कारण मिलता है।

मेरे अनुभव में, इस तरह का तत्काल फीडबैक छोटे सत्रों के लिए खास तौर पर उपयुक्त है। बच्चा लंबे निर्देश पढ़ने के बजाय दृश्य संकेत और प्रतिक्रिया से आगे बढ़ सकता है। अभिभावक के लिए इसका लाभ यह है कि वह बच्चे के सोचने के तरीके को देख सकता है: क्या वह चेहरे के संकेत पर ध्यान दे रहा है, स्थिति के संदर्भ पर, या केवल अनुमान लगा रहा है? यह निरीक्षण आगे की बातचीत को अधिक सटीक बनाता है।

यहाँ एक सूक्ष्म लेकिन उपयोगी अंतर है। यदि बच्चा किसी भावना को बार-बार एक ही नाम से पहचानता है, तो उसे तुरंत सुधारने के बजाय दो भावनाओं की तुलना कराएँ। उदाहरण के लिए, पूछें कि दोनों स्थितियों में शरीर या व्यवहार में क्या अलग हो सकता है। खेल के बाद की यह तुलना सीखने को मजबूत करती है, क्योंकि बच्चा केवल उत्तर याद नहीं करता बल्कि संकेतों को देखना सीखता है।

दूसरी ओर, फीडबैक को बहुत अधिक गंभीरता से लेना ठीक नहीं होगा। बच्चा किसी भावना का चुनाव इसलिए भी कर सकता है क्योंकि चित्र उसे पसंद आया, न कि इसलिए कि उसने भावनात्मक अर्थ समझा। इसीलिए मैं खेल के परिणाम को बच्चे के वास्तविक मूड का प्रमाण नहीं मानूँगा। इसे बातचीत का संकेत समझना बेहतर है, अंतिम निष्कर्ष नहीं।

दैनिक जीवन में इसका सबसे अच्छा उपयोग

मान लीजिए बच्चा स्कूल से लौटकर चुप है और बैग एक तरफ रखकर बैठ जाता है। उस समय सीधे समस्या पूछने के बजाय आप MoodiMe का एक छोटा सत्र शुरू कर सकते हैं। खेल में किसी भावना की पहचान के बाद बच्चे से पूछें कि क्या आज उसके साथ कुछ ऐसा हुआ था। यदि वह बात करना चाहे, तो सुनें; यदि वह चुप रहे, तो खेल को पूछताछ न बनाएं। यही संतुलन इस तरह के खेल को उपयोगी या परेशान करने वाला बना सकता है।

एक और अच्छा तरीका है कि अभिभावक बच्चे के उत्तर को अपने उत्तर से जोड़ें। “मुझे भी कभी-कभी ऐसा लगता है, तब मैं थोड़ी देर शांत बैठता हूँ” जैसी साधारण बात बच्चे को यह संदेश देती है कि भावनाएँ गलत नहीं हैं। खेल तब केवल पहचान सिखाने वाला साधन नहीं रहता, बल्कि भावनाओं को सामान्य और संभालने योग्य विषय बनाने में मदद करता है।

इनाम: अगली कोशिश के लिए छोटा प्रोत्साहन

खेल में सही कार्रवाई के बाद मिलने वाला प्रोत्साहन बच्चे को आगे बढ़ने की इच्छा देता है। इस तरह का इनाम भावनात्मक सीखने को परीक्षा जैसा महसूस होने से बचाता है। बच्चा यह अनुभव करता है कि ध्यान देना और जवाब देना किसी सकारात्मक प्रतिक्रिया तक ले जाता है। मेरे विचार से यही वह हिस्सा है जो पहली बार खेलने के बाद दूसरी कोशिश की संभावना बढ़ाता है।

लेकिन इनाम को सीखने का अकेला कारण नहीं बनना चाहिए। यदि बच्चा केवल पुरस्कार पाने के लिए तेजी से टैप करता है, तो भावनाओं की पहचान पीछे छूट सकती है। इसलिए मैं अभिभावक को सलाह दूँगा कि इनाम मिलने के तुरंत बाद एक छोटा विराम लें और पूछें कि बच्चे ने कौन-सी भावना चुनी। यह विराम खेल की गति को थोड़ा धीमा करता है, लेकिन सीखने का अर्थ अधिक स्पष्ट बनाता है।

निःशुल्क उपलब्धता इसे आजमाने में आसान बनाती है, हालांकि इसमें खरीदारी के विकल्प भी हैं, जिनकी कीमतें प्रति आइटम ₹220 से ₹2,250 तक हैं। इस वजह से बच्चे को बिना निगरानी के डिवाइस देना उचित नहीं है। खरीदारी से बचने के लिए डिवाइस की पारिवारिक या स्टोर-स्तरीय खरीद सुरक्षा पहले से सक्रिय रखना समझदारी होगी। यह सावधानी खेल की गुणवत्ता पर टिप्पणी नहीं, बल्कि बच्चों के साथ किसी भी इन-ऐप खरीदारी वाले अनुभव का व्यावहारिक हिस्सा है।

मेरे लिए महत्वपूर्ण बात यह है कि भुगतान किए गए विकल्पों को सीखने की आवश्यकता समझकर न लिया जाए। पहले निःशुल्क अनुभव को बच्चे के साथ इस्तेमाल करें और देखें कि वह भावनाओं पर बात करता है या केवल पुरस्कारों में रुचि लेता है। यदि वह बातचीत से लाभ पा रहा है, तो अतिरिक्त खर्च का निर्णय अधिक सोच-समझकर लिया जा सकता है। यदि उसका ध्यान केवल इनाम पर है, तो खरीदारी समस्या का समाधान नहीं करेगी।

इनाम को बातचीत में बदलने की तरकीब

एक उपयोगी अभ्यास यह है कि हर सत्र के अंत में बच्चा उस भावना का नाम बोले जिसे उसने पहचाना। अगली बार वही भावना आने पर उससे पूछें कि क्या पिछली बार जैसा ही लगा था। इससे खेल के इनाम को याद रखने योग्य बातचीत में बदला जा सकता है। यह तरीका खास तौर पर तब मदद करता है जब बच्चा भावनाओं के नाम जानता है, लेकिन उन्हें अपने अनुभवों से जोड़ने में अभी असमर्थ है।

मैं यह भी देखता हूँ कि कुछ बच्चे एक ही पसंदीदा विकल्प को बार-बार चुनना चाहते हैं। ऐसे समय में उन्हें रोकने के बजाय पूछें कि वह विकल्प उन्हें क्यों सही लगता है। कभी-कभी बच्चा अपनी भावना नहीं, किसी परिचित चित्र या रंग को चुन रहा होता है। यह छोटी-सी जाँच अभिभावक को बताती है कि बच्चा खेल की अवधारणा समझ रहा है या सिर्फ परिचित प्रतिक्रिया दोहरा रहा है।

सत्र रीसेट: फिर से शुरू करने का कारण

इस तरह के खेल का अच्छा सत्र बहुत लंबा होना जरूरी नहीं है। MoodiMe का मूल चक्र छोटा रखा जा सकता है: भावना पर ध्यान देना, चुनाव करना, प्रतिक्रिया पाना और फिर अगली स्थिति के लिए तैयार होना। जब एक सत्र समाप्त होता है, तो अगली बार लौटने का कारण नई भावनात्मक स्थिति को समझना हो सकता है, न कि केवल स्क्रीन पर अधिक समय बिताना।

मैं छोटे, नियमित सत्रों को लंबे और लगातार खेलने से बेहतर मानता हूँ। सुबह तैयार होते समय एक छोटा अभ्यास बच्चे को दिन की शुरुआत में अपने मूड पर ध्यान देने दे सकता है। शाम को वही खेल दिन की किसी घटना से जोड़कर इस्तेमाल किया जा सकता है। दोनों समय का उद्देश्य अलग है: सुबह पहचान, शाम समीक्षा। इस तरह खेल एक ही तरह की गतिविधि न रहकर दिनचर्या में दो अलग भूमिकाएँ निभा सकता है।

रीसेट का एक और लाभ है। यदि बच्चा किसी उत्तर को गलत समझता है, तो अगली स्थिति उसे बिना शर्मिंदगी के फिर कोशिश का अवसर देती है। भावनाओं के मामले में यह बहुत जरूरी है, क्योंकि बच्चे को यह महसूस नहीं होना चाहिए कि किसी भावना को पहचानने में गलती करना बुरी बात है। अभिभावक को भी “तुम गलत हो” कहने के बजाय “चलो इसे फिर से देखते हैं” कहना चाहिए।

फिर भी, बार-बार खेलने से सीखना अपने आप गहरा नहीं होता। यदि हर सत्र में वही सवाल, वही प्रतिक्रिया और वही बातचीत दोहराई जाए, तो बच्चा केवल पैटर्न याद कर सकता है। इसलिए सत्रों के बीच वास्तविक जीवन के उदाहरण जोड़ना जरूरी है। खेल में चुनी भावना को किसी कहानी, चित्र बनाने या दिन की घटना से जोड़ना रीसेट को अर्थपूर्ण बनाता है।

किस उम्र और किस तरह के परिवार के लिए

तीन वर्ष या उससे अधिक उम्र की रेटिंग इसे छोटे बच्चों के लिए सुलभ बनाती है, लेकिन वास्तविक उपयोग में बच्चे की भाषा क्षमता और ध्यान अवधि अधिक महत्वपूर्ण होंगे। कुछ बच्चे कम उम्र में भावनाओं के नाम जल्दी पकड़ लेते हैं, जबकि कुछ बड़े बच्चे भी दृश्य संकेतों के साथ बेहतर सीखते हैं। इसलिए उम्र की सीमा को कठोर अपेक्षा की तरह नहीं, शुरुआती मार्गदर्शन की तरह देखना चाहिए।

यह उन अभिभावकों के लिए अच्छा विकल्प है जो रोजाना भावनाओं पर बात करने का सरल बहाना चाहते हैं। यह प्रीस्कूल या शुरुआती स्कूल उम्र के बच्चों के साथ साझा गतिविधि के रूप में अधिक उपयोगी लगेगा। यदि बच्चा पहले से भावनाओं के बारे में खुलकर बात करता है, तो खेल उसे नए शब्दों से अधिक अभ्यास और संरचना दे सकता है।

इसके विपरीत, यदि आप विस्तृत अभिभावक रिपोर्ट, गहरी व्यवहार निगरानी या विशेषज्ञ-स्तरीय भावनात्मक आकलन चाहते हैं, तो यह सही विकल्प नहीं होगा। यह खेल बच्चे को अपनी भावना पहचानने की दिशा में ले जाता है, लेकिन किसी गंभीर चिंता, लगातार उदासी या व्यवहार में बड़े बदलाव का निदान नहीं करता। ऐसे मामलों में खेल को बातचीत के सहारे की तरह रखें और जरूरत पड़ने पर योग्य पेशेवर से सलाह लें।

लूप का फैसला: छोटा, उपयोगी और अभिभावक की भागीदारी पर निर्भर

मेरे लिए MoodiMe का मुख्य चक्र साफ है: बच्चा किसी भावनात्मक संकेत पर कार्रवाई करता है, उसे प्रतिक्रिया मिलती है, प्रोत्साहन उसे आगे बढ़ाता है, सत्र रीसेट होता है और अगली कोशिश के लिए नया संदर्भ बनता है। यह चक्र तभी सार्थक बनता है जब हर बार बच्चे को अपने जीवन से संबंध जोड़ने का अवसर मिले। केवल टैप करके आगे बढ़ने पर इसका शैक्षिक लाभ सीमित हो सकता है।

इसका औसत स्कोर 4.6 है और इसे दस हजार से अधिक बार इंस्टॉल किया जा चुका है, इसलिए यह पूरी तरह अनजाना प्रयोग नहीं लगता। फिर भी, मैं इन संख्याओं को व्यक्तिगत उपयुक्तता का विकल्प नहीं मानूँगा। किसी बच्चे के लिए चित्रात्मक भावनात्मक खेल बहुत प्रभावी हो सकता है, जबकि दूसरा बच्चा कहानी, बातचीत या वास्तविक गतिविधियों से बेहतर सीख सकता है।

पारंपरिक भावनात्मक कार्यपत्रकों की तुलना में इसका लाभ यह है कि बच्चा निष्क्रिय पढ़ने के बजाय चुनाव और प्रतिक्रिया के चक्र में शामिल रहता है। केवल वीडियो देखने की तुलना में यह अधिक सक्रिय है, क्योंकि बच्चे को कुछ पहचानना और उत्तर देना पड़ता है। दूसरी ओर, आमने-सामने बातचीत की गहराई इसमें अपने आप नहीं आती। माता-पिता, शिक्षक या देखभाल करने वाले की मौजूदगी इसे अधिक अर्थपूर्ण बनाती है।

मैं इसे तब सुझाऊँगा जब आपका लक्ष्य बच्चे को भावनाओं के नाम और शुरुआती संकेतों से परिचित कराना हो, खासकर तब जब आप खेल के बाद दो मिनट की बातचीत के लिए तैयार हों। इसे निःशुल्क शुरू करना आसान है, लेकिन इन-ऐप खरीदारी के कारण बच्चे के हाथ में डिवाइस देने से पहले खरीद सुरक्षा देख लेना चाहिए। अतिरिक्त विकल्प लेने का फैसला तभी करें जब मूल अनुभव आपके परिवार की दिनचर्या में सचमुच उपयोगी साबित हो।

अंततः, यह कोई जादुई समाधान नहीं है, लेकिन इसकी सादगी ही इसकी ताकत है। एक छोटे सत्र में बच्चा रुकता है, भावना पर ध्यान देता है, चुनाव करता है और फिर दोबारा कोशिश कर सकता है। यदि आप इस चक्र को वास्तविक जीवन की बातों से जोड़ते हैं, तो यह खेल भावनाओं को पहचानने की आदत बनाने में मदद कर सकता है। मेरी राय में, सबसे अच्छा परिणाम स्क्रीन से नहीं, स्क्रीन के बाद होने वाली बातचीत से आता है—और MoodiMe उस बातचीत की शुरुआत कराने के लिए एक उपयोगी, हल्का विकल्प है।

Unknown

MoodiMe: Find your Feelings क्या है और यह ऐप किसके लिए उपयोगी है?

MoodiMe: Find your Feelings एक मूड और भावनाओं को समझने में मदद करने वाला ऐप है। इसमें आप रोज़ाना अपने मन की स्थिति दर्ज कर सकते हैं, भावनाओं को पहचान सकते हैं और समय के साथ अपने मूड के पैटर्न देख सकते हैं। यह उन लोगों के लिए उपयोगी हो सकता है जो आत्म-जागरूकता बढ़ाना, तनावपूर्ण दिनों को नोट करना या अपनी भावनात्मक दिनचर्या पर नज़र रखना चाहते हैं।


क्या MoodiMe मानसिक स्वास्थ्य विशेषज्ञ या थेरेपी का विकल्प है?

नहीं, MoodiMe को मानसिक स्वास्थ्य विशेषज्ञ, डॉक्टर या पेशेवर थेरेपी के विकल्प के रूप में नहीं समझना चाहिए। यह मुख्य रूप से भावनाओं और मूड को रिकॉर्ड करने तथा व्यक्तिगत आदतों को समझने का एक सहायक उपकरण है। यदि आपको लंबे समय से उदासी, अत्यधिक चिंता, निराशा या स्वयं को नुकसान पहुँचाने के विचार महसूस हों, तो योग्य मानसिक स्वास्थ्य विशेषज्ञ से तुरंत संपर्क करना अधिक उचित है।


MoodiMe में मूड या भावनाओं को कैसे दर्ज किया जाता है?

ऐप का उपयोग करते समय आप अपनी वर्तमान भावना या मूड चुनकर उसे दर्ज कर सकते हैं और, उपलब्ध विकल्पों के अनुसार, उसके साथ नोट या संदर्भ भी जोड़ सकते हैं। नियमित रूप से प्रविष्टियाँ करने पर आपको यह समझने में सहायता मिल सकती है कि किन परिस्थितियों, गतिविधियों या दिनों में आपका मूड बदलता है। बेहतर परिणामों के लिए ईमानदारी से और लगातार रिकॉर्ड करना महत्वपूर्ण है।


क्या MoodiMe में मेरी निजी भावनात्मक जानकारी सुरक्षित रहती है?

मूड डायरी में दर्ज जानकारी निजी और संवेदनशील हो सकती है, इसलिए डाउनलोड करने से पहले ऐप की गोपनीयता नीति और डेटा-सुरक्षा विवरण अवश्य पढ़ें। देखें कि कौन-सा डेटा एकत्र किया जाता है, वह कहाँ संग्रहीत होता है और क्या किसी तीसरे पक्ष के साथ साझा किया जाता है। यदि ऐप खाता, क्लाउड सिंक्रोनाइज़ेशन या बैकअप की सुविधा देता है, तो उसकी सुरक्षा और हटाने के विकल्प भी जाँचें।


क्या MoodiMe मुफ़्त है और क्या इसे चलाने के लिए इंटरनेट कनेक्शन आवश्यक है?

MoodiMe की कीमत, विज्ञापन और प्रीमियम सुविधाएँ आपके डिवाइस, क्षेत्र तथा ऐप के वर्तमान संस्करण के अनुसार अलग हो सकती हैं। डाउनलोड करने से पहले Google Play Store या Apple App Store पर इन-ऐप खरीदारी और सदस्यता संबंधी जानकारी अवश्य देखें। कुछ मूल सुविधाएँ ऑफलाइन काम कर सकती हैं, लेकिन खाते, सिंक्रोनाइज़ेशन, बैकअप या विश्लेषण जैसी सुविधाओं के लिए इंटरनेट कनेक्शन आवश्यक हो सकता है।


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