DIKSHA Courses

शिक्षा

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पक्ष

  • कई भाषाओं में पाठ्यक्रम और अध्ययन सामग्री उपलब्ध है।
  • शिक्षकों के लिए प्रमाणपत्र आधारित कोर्स उपयोगी हैं।
  • ऑफलाइन डाउनलोड से बिना इंटरनेट भी सामग्री पढ़ सकते हैं।
  • QR कोड स्कैन कर पाठ्यपुस्तक की अतिरिक्त सामग्री मिलती है।
  • सरकारी और शैक्षिक स्रोतों से सामग्री अपेक्षाकृत विश्वसनीय है।

विपक्ष

  • कुछ कोर्स पूरे करने के बाद प्रमाणपत्र मिलने में देरी हो सकती है।
  • ऐप में कभी-कभी लॉगिन और OTP संबंधी समस्याएँ आती हैं।
  • डाउनलोड की गई सामग्री फोन में काफी स्टोरेज ले सकती है।
  • सभी पाठ्यक्रमों की गुणवत्ता और गहराई एक जैसी नहीं है।
  • कमजोर इंटरनेट पर वीडियो चलाने में बफरिंग की समस्या हो सकती है।
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DIKSHA Courses को इस्तेमाल करते हुए मुझे यह बात सबसे पहले समझ आई कि यह सामान्य वीडियो-लर्निंग ऐप से थोड़ा अलग अनुभव देने की कोशिश करता है। इसका केंद्र छात्रों और शिक्षकों के लिए पाठ्यक्रम है, इसलिए इसे केवल किसी एक विषय पर जल्दी-जल्दी जानकारी खोजने वाले ऐप की तरह देखना सही नहीं होगा। शिक्षा के क्षेत्र में NCERT का नाम इससे जुड़ा है, और ऐप मुफ्त होने के कारण इसे आज़माने की शुरुआती रुकावट काफी कम रहती है।

मेरे अनुभव में इसकी उपयोगिता इस बात पर निर्भर करती है कि आप सीखने को किस तरह व्यवस्थित करते हैं। अगर आप किसी पाठ्यक्रम को क्रम से पूरा करना चाहते हैं, शिक्षक के रूप में सामग्री देखना चाहते हैं, या पढ़ाई के लिए एक अलग डिजिटल जगह रखना चाहते हैं, तो यह उपयोगी साथी बन सकता है। लेकिन अगर आपकी प्राथमिकता बहुत तेज़, अत्यंत व्यक्तिगत और मनोरंजन-केंद्रित सीखना है, तो आपको इसकी शैली कुछ औपचारिक लग सकती है।

पढ़ने योग्य सामग्री और नेविगेशन का वास्तविक अनुभव

ऐप की सबसे महत्वपूर्ण ताकत इसका पाठ्यक्रम-केंद्रित ढांचा है। किसी विषय को अलग-अलग छोटे हिस्सों में देखने के बजाय उपयोगकर्ता सीखने की पूरी दिशा पर ध्यान दे सकता है। यह खास तौर पर उन छात्रों के लिए मददगार है जो पढ़ाई में नियमितता बनाना चाहते हैं, लेकिन हर दिन यह तय करने में समय गंवा देते हैं कि आज क्या पढ़ना है। शिक्षक भी इसे कक्षा की तैयारी के दौरान संदर्भ सामग्री के रूप में देख सकते हैं।

मैंने पाया कि ऐसे ऐप में केवल सामग्री की संख्या मायने नहीं रखती; सामग्री तक पहुंचने का रास्ता भी उतना ही जरूरी है। DIKSHA Courses का उपयोग करते समय मेरी सलाह होगी कि शुरुआत में एक ही पाठ्यक्रम चुनकर उसके हिस्सों को क्रम से समझें। हर उपलब्ध विकल्प को एक साथ खोलने पर ध्यान बंट सकता है। बेहतर अनुभव के लिए इसे सामग्री की अलमारी नहीं, बल्कि पढ़ाई की योजना की तरह इस्तेमाल करें।

पढ़ने की सुविधा व्यक्ति की आदतों पर भी निर्भर करती है। जिन लोगों को छोटे-छोटे चरणों में सीखना पसंद है, उन्हें पाठ्यक्रम वाला ढांचा स्वाभाविक लगेगा। दूसरी ओर, जो उपयोगकर्ता सीधे किसी खास उत्तर या एक पन्ने की जानकारी चाहते हैं, वे इस प्रक्रिया को थोड़ा धीमा महसूस कर सकते हैं। मेरे हिसाब से यह कमी नहीं, बल्कि डिजाइन का समझौता है: क्रमबद्ध सीखने के बदले तुरंत खोज की गति कुछ कम हो सकती है।

स्क्रीन पर लंबे पाठ को पढ़ते समय मैं छोटे सत्रों का तरीका अपनाऊंगा। एक बैठक में बहुत अधिक सामग्री पढ़ने के बजाय एक पाठ पूरा करके रुकना आंखों और ध्यान दोनों के लिए बेहतर है। यदि छात्र नोटबुक में तीन बातें लिख ले—क्या समझ आया, क्या दोबारा देखना है और अगला कदम क्या है—तो ऐप का पाठ्यक्रम अधिक सक्रिय अध्ययन में बदल जाता है। केवल स्क्रीन देखते रहने से सीखने का लाभ उतना मजबूत नहीं रहता।

छात्रों के लिए पढ़ाई को व्यवस्थित करने का तरीका

किसी छात्र के लिए इसका अच्छा उपयोग यह हो सकता है कि वह सप्ताह की शुरुआत में अपने पाठ्यक्रम का छोटा लक्ष्य तय करे। उदाहरण के लिए, स्कूल के बाद रोज़ एक भाग पढ़ना, फिर उसी विषय से जुड़े प्रश्नों या अभ्यास पर लौटना। यहां ऐप को अंतिम परीक्षा-तैयारी का अकेला साधन मानना ठीक नहीं होगा। पाठ्यपुस्तक, शिक्षक की व्याख्या और लिखित अभ्यास के साथ इसका उपयोग अधिक संतुलित परिणाम देता है।

एक उपयोगी आदत यह है कि कठिन हिस्से को तुरंत छोड़ने के बजाय उसका नाम अलग से लिख लिया जाए। बाद में शिक्षक से पूछते समय “मुझे यह अध्याय समझ नहीं आया” कहने के बजाय छात्र स्पष्ट सवाल रख सकता है। इस तरह डिजिटल पाठ्यक्रम बातचीत की जगह नहीं लेता, बल्कि बातचीत को अधिक सटीक बनाता है। यही वह उपयोग है जो सामान्य स्टोर विवरण से समझ में नहीं आता, लेकिन रोज़मर्रा में काफी काम आता है।

छोटे बच्चों के लिए अभिभावक की भूमिका महत्वपूर्ण रहेगी। उम्र के हिसाब से सामग्री का मूल्यांकन 3+ के लिए किया गया है, लेकिन इसका अर्थ यह नहीं कि हर बच्चा बिना सहायता के लंबे पाठ्यक्रम को समझ लेगा। छोटे विद्यार्थी को स्क्रीन पर छोड़ देने के बजाय अभिभावक शुरुआत में साथ बैठकर यह दिखा सकता है कि पाठ कैसे चुना जाए, कब रुकना है और समझ में न आने पर किससे पूछना है।

शिक्षकों के लिए उपयोगिता और व्यावहारिक सावधानी

शिक्षक इस ऐप को कक्षा से पहले तैयारी के लिए इस्तेमाल कर सकते हैं। पाठ्यक्रम देखकर उन्हें यह अंदाज़ा मिल सकता है कि किसी विषय को किस क्रम में प्रस्तुत किया जा सकता है। फिर वे कक्षा में अपनी भाषा, उदाहरण और स्थानीय संदर्भ जोड़ सकते हैं। मेरे विचार से यही सही तरीका है; ऐप की सामग्री को ज्यों का त्यों पढ़ाने के बजाय उसे अपनी कक्षा की जरूरत के अनुसार ढालना अधिक प्रभावी होगा।

शिक्षक के लिए एक और व्यावहारिक तरीका है कि वह पहले से दो स्तर तैयार रखे: एक सामान्य समझ के लिए और दूसरा उन छात्रों के लिए जिन्हें अतिरिक्त स्पष्टीकरण चाहिए। एक ही डिजिटल पाठ सभी विद्यार्थियों पर समान असर नहीं डालता। किसी को पढ़कर समझ आता है, किसी को बोलकर, और किसी को लिखकर अभ्यास करने पर। ऐप इस अंतर को पूरी तरह नहीं मिटाता, इसलिए शिक्षक की मध्यस्थ भूमिका बनी रहती है।

यहां एक महत्वपूर्ण ट्रेड-ऑफ है। संरचित पाठ्यक्रम शिक्षक का समय बचा सकता है, लेकिन अगर शिक्षक केवल ऐप की क्रम-व्यवस्था पर निर्भर हो जाए, तो कक्षा की वास्तविक गति और छात्रों की अलग-अलग जरूरतें पीछे छूट सकती हैं। मैं इसे पाठ-योजना का आधार मानूंगा, पूरा विकल्प नहीं।

अलग-अलग क्षमताओं और परिस्थितियों में पहुंच

पढ़ने, देखने और समझने की अलग जरूरतें

किसी शिक्षा ऐप की पहुंच केवल इस बात से तय नहीं होती कि वह खुल जाता है या नहीं। असली सवाल यह है कि अलग-अलग क्षमता और सीखने की शैली वाले लोग उसमें सामग्री को कितनी आसानी से समझ पाते हैं। DIKSHA Courses में पाठ्यक्रम की स्पष्ट दिशा उन उपयोगकर्ताओं के लिए लाभदायक हो सकती है जिन्हें खुले-छोर वाली ऐप्स में विकल्पों की अधिकता परेशान करती है। उन्हें पता रहता है कि अगला कदम किस पाठ या भाग की ओर हो सकता है।

फिर भी, पढ़ने में कठिनाई वाले छात्र के लिए लंबे अनुच्छेद चुनौती बन सकते हैं। ऐसे विद्यार्थी को सामग्री को छोटे हिस्सों में पढ़ना, महत्वपूर्ण शब्दों को अपनी कॉपी में लिखना और हर भाग के बाद मौखिक रूप से दोहराना चाहिए। यदि परिवार या शिक्षक साथ हो, तो वही सामग्री सुनकर समझने और फिर लिखकर अभ्यास करने का मिश्रित तरीका अपनाया जा सकता है। यह ऐप की किसी विशेष सुविधा का दावा नहीं, बल्कि उपलब्ध पाठ्यक्रम को अधिक सुलभ ढंग से इस्तेमाल करने की रणनीति है।

कम दृष्टि वाले उपयोगकर्ता के लिए फोन की अपनी टेक्स्ट-साइज़, स्क्रीन-रीडिंग या डिस्प्ले सेटिंग उपयोगी हो सकती हैं, लेकिन वास्तविक सुविधा डिवाइस और ऐप के व्यवहार पर निर्भर करेगी। इसलिए मैं ऐसे उपयोगकर्ता को सलाह दूंगा कि किसी महत्वपूर्ण अध्ययन योजना से पहले एक छोटा पाठ खोलकर देखें: क्या शीर्षक पहचान में आ रहे हैं, क्या बटन तक आसानी से पहुंचा जा रहा है और क्या पढ़ने की गति आरामदायक है। यदि शुरुआत में ही बहुत अधिक परेशानी हो, तो शिक्षक से मुद्रित या मौखिक विकल्प मांगना बेहतर है।

सुनने से जुड़ी जरूरतों के मामले में भी यही सावधानी जरूरी है। यदि किसी सामग्री को समझने के लिए केवल दृश्य या केवल श्रव्य माध्यम पर्याप्त न हो, तो छात्र को साथ में लिखित नोट्स, पाठ्यपुस्तक और शिक्षक की व्याख्या रखनी चाहिए। मैं किसी भी डिजिटल पाठ्यक्रम को सभी संवेदी जरूरतों का अपने-आप समाधान नहीं मानूंगा। समावेशी उपयोग के लिए सामग्री के साथ वैकल्पिक मानवीय सहायता भी चाहिए।

मोटर नियंत्रण और स्क्रीन इस्तेमाल

जिन उपयोगकर्ताओं को सटीक टैप करने, लंबे समय तक फोन पकड़ने या तेजी से स्क्रीन पर काम करने में कठिनाई होती है, उनके लिए पढ़ाई की गति कम रखना उपयोगी रहेगा। एक साथ बहुत देर तक मोबाइल पकड़ने के बजाय फोन को स्थिर सतह पर रखना, सत्र छोटे रखना और हर चरण के बाद विराम लेना व्यावहारिक उपाय हैं। ये छोटे बदलाव ऐप को अधिक आरामदायक बना सकते हैं, खासकर तब जब विद्यार्थी को पहले से हाथ, उंगलियों या शरीर की थकान की समस्या हो।

नेविगेशन में किसी विकल्प को गलती से चुन लेना छोटे बच्चों या सीमित मोटर नियंत्रण वाले उपयोगकर्ताओं के लिए निराशाजनक हो सकता है। इसलिए अभिभावक या शिक्षक शुरुआत में एक शांत अभ्यास सत्र रख सकते हैं, जिसमें विद्यार्थी केवल पाठ खोलना, वापस जाना और अगला भाग चुनना सीखे। पढ़ाई और तकनीकी नियंत्रण को एक ही समय पर सीखने की मजबूरी कम होगी।

मेरे लिए यहां सबसे उपयोगी निष्कर्ष यह है कि पहुंच केवल ऐप की जिम्मेदारी नहीं होनी चाहिए, लेकिन उपयोगकर्ता को सारी मेहनत अकेले भी नहीं करनी चाहिए। परिवार, शिक्षक और डिवाइस की सेटिंग मिलकर अनुभव को बेहतर बनाते हैं। यदि किसी छात्र को हर बार किसी दूसरे व्यक्ति की मदद के बिना आगे बढ़ना संभव नहीं लगता, तो वैकल्पिक सामग्री या आमने-सामने सहायता अधिक सही विकल्प हो सकती है।

कमज़ोर कनेक्शन, साझा फोन और बदलती दिनचर्या

वास्तविक जीवन में हर विद्यार्थी के पास पढ़ाई के लिए अलग फोन या स्थिर इंटरनेट नहीं होता। साझा डिवाइस वाले घर में पढ़ाई का समय अक्सर परिवार के दूसरे कामों के बीच तय होता है। ऐसे माहौल में मैं छोटे लक्ष्य रखूंगा और उपयोग के बाद यह लिख लूंगा कि अगली बार किस पाठ से शुरू करना है। इससे दोबारा ऐप खोलने पर समय खोजने में नहीं जाएगा।

अगर विद्यार्थी स्कूल, घर या यात्रा के बीच पढ़ता है, तो उसे यह मानकर योजना नहीं बनानी चाहिए कि हर समय समान सुविधा मिलेगी। महत्वपूर्ण सामग्री को समझने के लिए पहले शांत समय चुनना बेहतर है, जबकि दोहराव और नोट्स देखना छोटे विरामों में किया जा सकता है। इस तरह ऐप को परिस्थिति के अनुसार बांटा जा सकता है, न कि हर जगह एक जैसा इस्तेमाल करने की कोशिश की जाए।

यही वजह है कि यह ऐप उन परिवारों के लिए अधिक उपयोगी हो सकता है जो पढ़ाई को धीरे-धीरे व्यवस्थित करना चाहते हैं, न कि हर दिन लंबा ऑनलाइन सत्र कराना चाहते हैं। लेकिन जिन छात्रों को लगातार शिक्षक की आवाज़, तुरंत सवाल-जवाब या प्रयोगात्मक गतिविधियों की जरूरत है, उनके लिए केवल मोबाइल पाठ्यक्रम पर्याप्त नहीं होगा।

जहां अनुभव में अभी भी रुकावट आ सकती है

मेरी सबसे बड़ी सावधानी यह है कि डिजिटल पाठ्यक्रम को समान अवसर का पूरा समाधान समझना गलत होगा। पढ़ने की क्षमता, भाषा की सहजता, घर का वातावरण, इंटरनेट की उपलब्धता और मार्गदर्शन—इन सभी का असर पड़ता है। एक ही स्क्रीन पर वही पाठ किसी विद्यार्थी के लिए स्पष्ट हो सकता है और दूसरे के लिए बहुत धीमा या कठिन। इसलिए ऐप का उपयोग शुरू करने से पहले छात्र की वास्तविक जरूरत समझना जरूरी है।

दूसरी रुकावट ध्यान से जुड़ी है। मोबाइल पर पढ़ते समय संदेश, दूसरे ऐप और घर के काम बीच में आ सकते हैं। यदि विद्यार्थी बार-बार सत्र तोड़ता है, तो पाठ्यक्रम की निरंतरता कमजोर हो सकती है। मैं पढ़ाई के समय सूचनाएं बंद करने, फोन को केवल एक काम के लिए रखने और हर सत्र के अंत में छोटा लिखित सार बनाने की सलाह दूंगा। यह तरीका ऐप की सामग्री को याद रखने में मदद करता है और ध्यान भटकने का नुकसान घटाता है।

तीसरी सीमा यह है कि किसी पाठ को पूरा कर लेना और उसे समझ लेना एक ही बात नहीं है। छात्रों को स्वयं से सवाल पूछने, उदाहरण हल करने और शिक्षक से पुष्टि लेने की जरूरत रहेगी। यदि आपका लक्ष्य केवल प्रमाणपत्र-जैसी पूर्णता या स्क्रीन पर प्रगति देखना है, तो अनुभव अधूरा रह सकता है। असली लाभ तब आता है जब ऐप के बाद विद्यार्थी कुछ समझाकर, लिखकर या लागू करके दिखाए।

मेरे उपयोग में आया रोज़मर्रा का परिदृश्य

मान लीजिए एक छात्र स्कूल से लौटने के बाद आधे घंटे में पढ़ना चाहता है, लेकिन घर में शांत कमरा उपलब्ध नहीं है। वह पहले से तय पाठ खोल सकता है, सामग्री को छोटे हिस्से में देख सकता है और केवल कठिन बिंदु कॉपी में लिख सकता है। अगले दिन वह शिक्षक से उन्हीं बिंदुओं पर सवाल पूछे। इस प्रक्रिया में ऐप घर और कक्षा के बीच पुल बनता है, लेकिन शिक्षक की जगह नहीं लेता।

एक शिक्षक भी इसी तरह सप्ताह की तैयारी कर सकता है। वह पाठ्यक्रम देखकर मुख्य अवधारणाएं चुन सकता है, फिर कक्षा में स्थानीय उदाहरण जोड़ सकता है और जिन छात्रों को पढ़ने में कठिनाई है उनके लिए मौखिक समझाइश रख सकता है। इस workflow का लाभ यह है कि डिजिटल सामग्री तैयारी को दिशा देती है, जबकि मानवीय समझ कक्षा को लचीला बनाए रखती है।

किसे इसे चुनना चाहिए और किसे दूसरा विकल्प देखना चाहिए

मेरे अनुसार DIKSHA Courses उन छात्रों के लिए अच्छा विकल्प है जिन्हें पाठ्यक्रम के अनुसार पढ़ने की आदत बनानी है, उन शिक्षकों के लिए जो डिजिटल सामग्री को तैयारी में शामिल करना चाहते हैं, और उन परिवारों के लिए जो मुफ्त शिक्षा संसाधन से शुरुआत करना चाहते हैं। इसका उपयोग विशेष रूप से तब समझदारी भरा है जब आप नियमित, छोटे और लक्ष्य-आधारित सत्र कर सकें।

इसके विपरीत, अगर आपको तुरंत व्यक्तिगत ट्यूटर जैसा संवाद, बहुत तेज़ सवाल-जवाब, खेल जैसी प्रेरणा या किसी खास परीक्षा के लिए अत्यंत केंद्रित अभ्यास चाहिए, तो कोई दूसरी शिक्षा सेवा बेहतर बैठ सकती है। इसी तरह, जिन उपयोगकर्ताओं को लगातार श्रव्य मार्गदर्शन या पूरी तरह अनुकूलित दृश्य प्रस्तुति चाहिए, उन्हें पहले छोटे स्तर पर अनुभव जांचना चाहिए और जरूरत पड़ने पर शिक्षक-समर्थित विकल्प चुनना चाहिए।

सामान्य वीडियो प्लेटफॉर्म की तुलना में इसका पाठ्यक्रम वाला दृष्टिकोण अधिक अनुशासित महसूस हो सकता है, जबकि खुले खोज-आधारित ऐप्स अधिक स्वतंत्रता देते हैं। लेकिन स्वतंत्रता के साथ भटकने का जोखिम भी आता है। यहां मेरा चुनाव साफ है: यदि मुझे सीखने का क्रम चाहिए, तो मैं DIKSHA Courses को प्राथमिकता दूंगा; यदि मुझे किसी एक सवाल का तुरंत, संवादात्मक समाधान चाहिए, तो मैं शिक्षक या अधिक इंटरैक्टिव विकल्प की ओर जाऊंगा।

तकनीकी जानकारी और मेरा अंतिम फैसला

यह NCERT द्वारा विकसित शिक्षा ऐप है और इसे मुफ्त में इस्तेमाल किया जा सकता है। यह 3+ के लिए रेट किया गया है, 30 अगस्त 2024 को जारी हुआ था और वर्तमान संस्करण 3.0.9 है। Android पर इसे चलाने के लिए 7.0 या उसके बाद का सिस्टम चाहिए। इन बातों का व्यावहारिक अर्थ यह है कि पुराने फोन वाले परिवार को पहले अपने डिवाइस की संगतता देख लेनी चाहिए, जबकि नए उपयोगकर्ता बिना कीमत की चिंता के इसे आज़मा सकते हैं।

इसकी लोकप्रियता भी कम नहीं है: इसे दस लाख से अधिक बार इंस्टॉल किया गया है, करीब पांच हजार रेटिंग मिली हैं और औसत रेटिंग 3.9 है। मैं इन आंकड़ों को गुणवत्ता की अंतिम गारंटी नहीं मानता, लेकिन वे यह संकेत जरूर देते हैं कि ऐप का उपयोग एक बड़े समूह ने किया है। रेटिंग मध्यम स्तर की होने के कारण मेरी सलाह यही रहेगी कि इसे अपने खास अध्ययन-उद्देश्य के साथ जांचें, केवल संख्या देखकर निर्णय न लें।

अंत में, DIKSHA Courses मुझे ऐसा शिक्षा ऐप लगता है जिसकी असली ताकत चमकदार प्रस्तुति से अधिक उसके पाठ्यक्रम-केंद्रित उपयोग में है। यह अलग-अलग क्षमताओं और परिस्थितियों वाले उपयोगकर्ताओं के लिए उपयोगी आधार दे सकता है, खासकर जब परिवार या शिक्षक पढ़ने की गति, नोट्स और वैकल्पिक समझाइश में सहयोग करें। लेकिन इसे पूरी तरह स्वचालित, हर विद्यार्थी के लिए समान रूप से सुलभ समाधान समझना सही नहीं होगा।

मैं इसे उन लोगों को सुझाऊंगा जो मुफ्त, व्यवस्थित और शैक्षिक सामग्री के साथ नियमित आदत बनाना चाहते हैं। मेरी ईमानदार सलाह है कि पहले एक छोटा पाठ्यक्रम लेकर पढ़ने की सुविधा, नेविगेशन और अपने डिवाइस के साथ अनुभव जांचें। अगर यह आपके लिए सहज बैठता है, तो यह पढ़ाई को बिखरे हुए ऑनलाइन संसाधनों से निकालकर अधिक स्पष्ट दिशा दे सकता है; अगर नहीं, तो शिक्षक-समर्थित या अधिक व्यक्तिगत विकल्प आपके लिए बेहतर रहेंगे।

Unknown

DIKSHA Courses क्या है और इसमें किस प्रकार के पाठ्यक्रम उपलब्ध हैं?

DIKSHA Courses भारत सरकार और शिक्षा विभागों से जुड़ा डिजिटल लर्निंग प्लेटफ़ॉर्म है, जहाँ विद्यार्थियों, शिक्षकों और अन्य शिक्षाकर्मियों के लिए अलग-अलग ऑनलाइन पाठ्यक्रम मिलते हैं। इनमें विषय-आधारित पाठ, प्रशिक्षण मॉड्यूल, वीडियो, पीडीएफ, क्विज़ और मूल्यांकन शामिल हो सकते हैं। उपलब्ध सामग्री राज्य, कक्षा, भाषा और उपयोगकर्ता की भूमिका के अनुसार अलग-अलग दिखाई दे सकती है।


क्या DIKSHA Courses का उपयोग करने के लिए पंजीकरण या मोबाइल नंबर आवश्यक है?

कई पाठ्यक्रमों की सामग्री बिना लॉगिन के देखी जा सकती है, लेकिन पाठ्यक्रम में नामांकन, प्रगति सुरक्षित रखने, क्विज़ पूरा करने या प्रमाणपत्र प्राप्त करने के लिए पंजीकरण आवश्यक हो सकता है। आमतौर पर मोबाइल नंबर, ईमेल या किसी आधिकारिक लॉगिन की जरूरत पड़ सकती है। पंजीकरण से पहले ऐप में मांगी जाने वाली अनुमतियों और जानकारी को ध्यान से जांचना बेहतर है।


क्या DIKSHA Courses में प्रमाणपत्र मिलता है और उसे कैसे प्राप्त किया जा सकता है?

कुछ DIKSHA पाठ्यक्रम सफलतापूर्वक पूरा करने पर डिजिटल प्रमाणपत्र प्रदान करते हैं, लेकिन हर कोर्स में यह सुविधा उपलब्ध हो, ऐसा जरूरी नहीं है। प्रमाणपत्र के लिए निर्धारित मॉड्यूल पूरे करना, वीडियो या पाठ देखना, क्विज़ में न्यूनतम अंक प्राप्त करना और कभी-कभी अंतिम मूल्यांकन पास करना पड़ सकता है। पात्रता और डाउनलोड विकल्प संबंधित पाठ्यक्रम के विवरण में जांचें।


क्या DIKSHA Courses ऑफलाइन भी चलाए जा सकते हैं?

DIKSHA में कुछ शैक्षिक सामग्री डाउनलोड करके सीमित रूप से ऑफलाइन देखने की सुविधा मिल सकती है, जिससे कमजोर इंटरनेट कनेक्शन वाले उपयोगकर्ताओं को मदद मिलती है। हालांकि, नामांकन, प्रगति सिंक्रोनाइज़ करना, क्विज़ जमा करना, प्रमाणपत्र प्राप्त करना या नई सामग्री लोड करने के लिए इंटरनेट कनेक्शन की आवश्यकता पड़ सकती है। ऑफलाइन उपलब्धता पाठ्यक्रम और सामग्री के प्रकार पर निर्भर करती है।


DIKSHA Courses बच्चों और शिक्षकों के लिए कितना उपयोगी है, और डाउनलोड से पहले किन बातों का ध्यान रखें?

यह प्लेटफ़ॉर्म स्कूली विद्यार्थियों, शिक्षकों और शिक्षा से जुड़े कर्मचारियों के लिए उपयोगी हो सकता है, क्योंकि इसमें पाठ्यक्रम-आधारित सामग्री और प्रशिक्षण संसाधन एक ही स्थान पर मिलते हैं। डाउनलोड करने से पहले अपने राज्य, बोर्ड, कक्षा और भाषा के अनुसार सामग्री उपलब्ध है या नहीं, यह जांचें। ऐप का नवीनतम संस्करण रखें और प्रमाणपत्र या आधिकारिक प्रशिक्षण के लिए संबंधित विभाग के निर्देशों को प्राथमिकता दें।


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