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पक्ष

  • दिव्यांग विद्यार्थियों की पहचान और मूल्यांकन में मदद करता है।
  • विशेष जरूरतों के अनुसार शैक्षिक सहायता की योजना बनाना आसान होता है।
  • शिक्षकों और अभिभावकों के बीच जानकारी साझा करने में सहायक।
  • डेटा व्यवस्थित रखने से विद्यार्थी की प्रगति पर नजर रहती है।
  • समावेशी शिक्षा से जुड़े कार्यों के लिए उपयोगी डिजिटल प्लेटफॉर्म।

विपक्ष

  • ऐप का उपयोग प्रभावी बनाने के लिए सही और पूरी जानकारी भरनी पड़ती है।
  • कुछ सुविधाएं केवल अधिकृत स्कूल या विभागीय उपयोगकर्ताओं तक सीमित हो सकती हैं।
  • पहली बार इस्तेमाल करने वालों को इंटरफेस समझने में समय लग सकता है।
  • कमजोर इंटरनेट कनेक्शन में डेटा सिंक या लॉगिन प्रभावित हो सकता है।
  • स्थानीय भाषा और डिवाइस संगतता का अनुभव सभी उपयोगकर्ताओं में समान नहीं हो सकता।
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किसी बच्चे की सीखने की जरूरत को समझने के लिए केवल परीक्षा के अंक देखना पर्याप्त नहीं होता। इसी जगह PRASHAST उपयोगी लगता है। यह NCERT का शिक्षा-केंद्रित ऐप है, जिसका उद्देश्य पूर्व-मूल्यांकन के जरिए समग्र स्क्रीनिंग में सहायता करना है। मैंने इसे इसी नजरिए से देखा: क्या यह शिक्षक या स्कूल को अलग-अलग क्षमताओं और परिस्थितियों वाले बच्चों के बारे में शुरुआती समझ बनाने में मदद करता है, और क्या इसका इस्तेमाल रोजमर्रा के काम में सहज है?

मेरे अनुभव में यह पढ़ाई सिखाने वाला सामान्य ऐप नहीं है। इसमें पाठ, क्विज या मनोरंजन आधारित अभ्यास खोजने वाले उपयोगकर्ता को यह अलग तरह का साधन मिलेगा। इसका मूल्यांकन-उन्मुख स्वरूप इसे शिक्षकों, विशेष शिक्षकों, स्कूल समन्वयकों और अभिभावकों के लिए अधिक प्रासंगिक बनाता है। ऐप मुफ्त है, 3+ आयु वर्ग के लिए रेट किया गया है और Android 7.0 या उसके बाद के संस्करण पर चल सकता है।

स्क्रीनिंग को समझने और इस्तेमाल करने का व्यावहारिक अनुभव

पढ़ने और नेविगेशन में स्पष्टता

ऐप खोलते समय सबसे महत्वपूर्ण बात यह समझना है कि PRASHAST किसी बच्चे को लेबल देने के लिए नहीं, बल्कि आगे की शैक्षिक सहायता पर विचार करने के लिए शुरुआती संकेत जुटाने का माध्यम है। यह फर्क बहुत जरूरी है। स्क्रीनिंग को अंतिम निदान मान लेना गलत होगा, इसलिए शिक्षक को हर परिणाम को बच्चे के व्यवहार, कक्षा के काम और परिवार से मिली जानकारी के साथ पढ़ना चाहिए।

नेविगेशन का मूल्यांकन करते हुए मुझे लगा कि ऐसे ऐप में सरल क्रम बहुत मायने रखता है। उपयोगकर्ता को पहले यह स्पष्ट होना चाहिए कि किस बच्चे की जानकारी दर्ज की जा रही है, कौन-सा हिस्सा पूरा हुआ है और अगला कदम क्या है। पहली बार इस्तेमाल करने वाले शिक्षक के लिए मेरी सलाह है कि वास्तविक कक्षा सत्र से पहले ऐप को शांत समय में खोलकर पूरा प्रवाह देखें। इससे बच्चे के सामने रुकने, वापस जाने या गलत विकल्प चुनने की संभावना घटती है।

पढ़ने की सुविधा केवल बड़े अक्षरों से तय नहीं होती। हिंदी में लंबे निर्देश, तकनीकी शब्द और लगातार स्क्रीन बदलना किसी शिक्षक के लिए थकाऊ हो सकता है, खासकर तब जब उसे एक साथ बच्चे को देखना, उत्तर समझाना और जानकारी दर्ज करनी हो। इसलिए मैं हर प्रश्न को पहले खुद पढ़ने, उसका आशय साधारण भाषा में समझने और फिर बच्चे की प्रतिक्रिया दर्ज करने का तरीका बेहतर मानता हूं। बच्चे को स्क्रीन पर लिखे वाक्य अकेले पढ़ने के लिए मजबूर करना हर स्थिति में उचित नहीं होगा।

PRASHAST को कक्षा की सामान्य गतिविधि के बीच जल्दबाजी में चलाने के बजाय निर्धारित समय देना अधिक समझदारी है। एक छोटा नोटपैड पास रखना भी उपयोगी है, ताकि शिक्षक बच्चे के मौखिक उत्तर, ध्यान में बदलाव या किसी खास परिस्थिति को अलग से लिख सके। ऐप में दर्ज जानकारी महत्वपूर्ण हो सकती है, लेकिन वास्तविक संदर्भ खो जाने पर उसका अर्थ अधूरा रह जाएगा।

अलग क्षमताओं के लिए उपयोग का सही तरीका

समावेशी स्क्रीनिंग में सबसे बड़ा सवाल यह नहीं है कि बच्चा ऐप के प्रश्नों का उत्तर कितनी तेजी से देता है। असली सवाल यह है कि वह प्रश्न किस तरीके से समझता है, जवाब देने के लिए उसे कितना समय चाहिए और क्या किसी सहायक तरीके की जरूरत है। उदाहरण के लिए, बोलकर उत्तर देने वाला बच्चा टाइप करने वाले बच्चे से अलग अनुभव करेगा। इसी तरह देखने, सुनने, चलने-फिरने, ध्यान बनाए रखने या भाषा समझने में कठिनाई वाले बच्चों के लिए एक ही प्रक्रिया समान रूप से आसान नहीं हो सकती।

मेरी व्यावहारिक सलाह है कि स्क्रीनिंग शुरू करने से पहले बच्चे की पसंदीदा संचार शैली पहचानें। यदि बच्चा संकेत, इशारे, छोटे वाक्य या सहायक व्यक्ति के माध्यम से प्रतिक्रिया देता है, तो शिक्षक को केवल ऐप की गति के आधार पर उसकी क्षमता नहीं आंकनी चाहिए। उत्तर दर्ज करने वाला वयस्क बच्चे के आशय को समझकर काम करे, लेकिन अपनी व्याख्या को बच्चे के उत्तर की जगह न रख दे। यही वह बारीकी है जो किसी भी डिजिटल स्क्रीनिंग को अधिक निष्पक्ष बनाती है।

मोटर संबंधी कठिनाई वाले बच्चे के लिए छोटे बटन दबाना, लंबे समय तक फोन पकड़ना या बार-बार स्क्रीन बदलना परेशानी पैदा कर सकता है। ऐसे मामले में डिवाइस को स्थिर सतह पर रखना, बच्चे को पर्याप्त विराम देना और जहां संभव हो, शिक्षक द्वारा इनपुट दर्ज करना बेहतर है। इससे ऐप बच्चे की उंगली की गति को उसकी सीखने की क्षमता समझने की गलती कम करेगा।

संवेदी जरूरतों को भी नजरअंदाज नहीं करना चाहिए। तेज रोशनी, शोर वाला कमरा, भीड़ या लगातार निर्देश कुछ बच्चों के लिए ध्यान केंद्रित करना कठिन बना सकते हैं। मैंने पाया कि शांत जगह में, छोटे सत्रों में और एक समय में एक निर्देश के साथ काम करना अधिक व्यावहारिक है। यह PRASHAST की कोई विशेष सुविधा नहीं, बल्कि उसके उपयोग का जिम्मेदार तरीका है।

दैनिक स्कूल परिस्थिति में इसका इस्तेमाल

एक सामान्य उदाहरण लें। किसी शिक्षक को लगता है कि कक्षा में एक बच्चा पढ़ने के निर्देशों का पालन नहीं कर पा रहा, जबकि मौखिक बातचीत में वह काफी सक्रिय है। शिक्षक PRASHAST के माध्यम से शुरुआती स्क्रीनिंग करता है, लेकिन बच्चे को केवल लिखित प्रतिक्रिया देने के लिए बाध्य नहीं करता। वह प्रश्न समझाकर बच्चे को बोलने या संकेत देने का अवसर देता है, फिर अपनी टिप्पणियां अलग से दर्ज करता है। बाद में वह अभिभावक से बातचीत और कक्षा के काम को साथ रखकर देखता है। इस तरह ऐप निर्णय का अकेला आधार नहीं, बल्कि आगे की चर्चा का व्यवस्थित प्रारंभ बनता है।

दूसरी स्थिति में किसी स्कूल को कई बच्चों की जरूरतों का प्रारंभिक अवलोकन करना हो सकता है। यहां एक साथ बहुत सारे सत्र करने की जल्दबाजी नुकसानदेह होगी। स्क्रीनिंग के बीच छोटे अंतराल रखना और हर बच्चे के लिए अलग संदर्भ नोट करना अधिक विश्वसनीय तरीका है। समान उत्तर का अर्थ हर बच्चे के लिए समान नहीं होता; घर की भाषा, कक्षा का माहौल और पहले से मिली सहायता परिणाम को प्रभावित कर सकते हैं।

अभिभावक के लिए इसका सबसे अच्छा उपयोग तब है जब वह शिक्षक से पूछे कि स्क्रीनिंग के बाद अगला कदम क्या होगा। केवल यह जानना कि किसी क्षेत्र में अतिरिक्त ध्यान चाहिए, पर्याप्त नहीं है। बच्चे के लिए कक्षा में कौन-सा बदलाव किया जाएगा, किस विशेषज्ञ से सलाह ली जाएगी और प्रगति कैसे देखी जाएगी—इन सवालों पर बातचीत जरूरी है। ऐप इस संवाद को दिशा दे सकता है, लेकिन परिवार और स्कूल के बीच संवाद की जगह नहीं ले सकता।

सामान्य शैक्षिक ऐप्स से इसका अंतर

सामान्य शिक्षा ऐप अक्सर अभ्यास, पाठ्य सामग्री, वीडियो या परीक्षा तैयारी पर केंद्रित होते हैं। PRASHAST का काम अलग है। यह बच्चे को गणित या भाषा सिखाने के बजाय यह समझने में सहायता करता है कि सीखने की प्रक्रिया में किस तरह का समर्थन आवश्यक हो सकता है। इसलिए इसकी तुलना सीधे पढ़ाई वाले ऐप से करना उचित नहीं होगा।

किसी ऑनलाइन क्विज में तुरंत सही या गलत उत्तर मिल सकता है, लेकिन समावेशी स्क्रीनिंग में धीमी प्रतिक्रिया, अलग संचार शैली या परिस्थिति का प्रभाव भी मायने रखता है। PRASHAST का उपयोग करने वाले व्यक्ति को इस अंतर को समझना होगा। अगर आपका उद्देश्य बच्चे को रोजाना अभ्यास कराना है, तो कोई शिक्षण ऐप बेहतर विकल्प हो सकता है। अगर उद्देश्य शुरुआती स्तर पर व्यापक जरूरतों को व्यवस्थित ढंग से देखना है, तो यह अधिक उपयुक्त दिशा देता है।

फिर भी, कागज और बातचीत को पूरी तरह हटाना सही नहीं होगा। कागजी नोट्स अधिक लचीले हो सकते हैं और शिक्षक तुरंत अतिरिक्त टिप्पणी लिख सकता है। दूसरी ओर, डिजिटल प्रक्रिया जानकारी को एक क्रम में रखने में मदद कर सकती है। मेरे लिए सबसे मजबूत तरीका मिश्रित है: ऐप में स्क्रीनिंग का ढांचा, और साथ में शिक्षक के अवलोकन तथा परिवार की जानकारी।

जहां उपयोग में रुकावट आ सकती है

ऐप की उपयोगिता उस व्यक्ति की समझ पर बहुत निर्भर है जो स्क्रीनिंग कर रहा है। यदि शिक्षक प्रश्नों को परीक्षा की तरह प्रस्तुत करेगा, तो बच्चा दबाव महसूस कर सकता है और परिणाम वास्तविक क्षमता के बजाय उस क्षण की घबराहट दिखा सकता है। इसी तरह, यदि वयस्क पहले से किसी निष्कर्ष पर पहुंचा हुआ है, तो वह बच्चे के उत्तरों को उसी नजरिए से पढ़ सकता है। इसलिए निष्पक्ष भाषा और धैर्य तकनीकी सुविधा जितने ही महत्वपूर्ण हैं।

भाषाई संदर्भ भी चुनौती बन सकता है। घर में बोली जाने वाली भाषा और स्कूल की भाषा अलग होने पर बच्चा प्रश्न समझने में अधिक समय ले सकता है। इसे तुरंत सीखने की कठिनाई मान लेना उचित नहीं। शिक्षक को यह देखना चाहिए कि समस्या निर्देश समझने की है, उत्तर व्यक्त करने की है या वास्तव में कार्य करने की। यही अलगाव स्क्रीनिंग को अधिक उपयोगी बनाता है।

डिजिटल पहुंच की असमानता भी ध्यान देने योग्य है। हर स्कूल में समान गुणवत्ता का फोन, स्थिर इंटरनेट या शांत कमरा उपलब्ध हो, यह मानकर चलना व्यावहारिक नहीं है। यदि ऐप का कोई हिस्सा लोड होने में समय लेता है या सत्र बाधित हो जाता है, तो शिक्षक को बच्चे पर दबाव डालकर प्रक्रिया पूरी नहीं करनी चाहिए। उपलब्ध परिस्थितियों को नोट करके सत्र को उचित समय पर दोहराना बेहतर है।

एक और सीमा यह है कि स्क्रीनिंग के बाद सहायता की व्यवस्था स्कूल की क्षमता पर निर्भर करेगी। ऐप किसी बच्चे की जरूरत का संकेत दे सकता है, लेकिन प्रशिक्षित व्यक्ति, कक्षा में अनुकूलन और लगातार निगरानी के बिना वह संकेत वास्तविक सुधार में नहीं बदलेगा। इसलिए इसे समाधान का पूरा पैकेज समझना गलत अपेक्षा होगी।

गोपनीयता और जिम्मेदार साझा करना

बच्चे से जुड़ी जानकारी संवेदनशील होती है। मैं सलाह दूंगा कि शिक्षक स्क्रीनिंग के दौरान आसपास मौजूद लोगों की संख्या कम रखे और परिणाम को पूरी कक्षा या अनावश्यक समूह में साझा न करे। अभिभावक से बात करते समय कठिनाई को दोष की तरह नहीं, सहायता की जरूरत की तरह समझाना चाहिए। बच्चे की गरिमा बनाए रखना किसी भी स्क्रीनिंग प्रक्रिया की पहली शर्त है।

स्क्रीन पर दर्ज उत्तर को परिवार के सामने पढ़ते समय भी भाषा सावधानी से चुननी चाहिए। “बच्चा नहीं कर सकता” कहने के बजाय “इस परिस्थिति में बच्चे को अतिरिक्त सहायता दिखी” कहना अधिक सटीक और कम कलंकित करने वाला है। यह छोटा बदलाव शिक्षक, परिवार और बच्चे के बीच भरोसा बनाए रखता है।

किसके लिए यह ऐप सही है

PRASHAST उन शिक्षकों के लिए अच्छा विकल्प है जो कक्षा में दिख रही कठिनाइयों को व्यवस्थित तरीके से समझना चाहते हैं। विशेष शिक्षा से जुड़े पेशेवर, स्कूल प्रमुख और समावेशी शिक्षा पर काम करने वाले समन्वयक भी इसे शुरुआती बातचीत के आधार के रूप में उपयोग कर सकते हैं। अभिभावक इसे अकेले निदान उपकरण की तरह न चलाएं; शिक्षक या संबंधित विशेषज्ञ के साथ मिलकर इसका अर्थ समझना अधिक सुरक्षित है।

यह उन लोगों के लिए कम उपयुक्त है जो तुरंत प्रमाणित चिकित्सकीय निष्कर्ष, विस्तृत उपचार योजना या रोजाना सीखने का अभ्यास चाहते हैं। इसी तरह, जो उपयोगकर्ता केवल सरल मनोरंजक गतिविधियों वाला शिक्षा ऐप खोज रहे हैं, उन्हें इसका स्क्रीनिंग-केंद्रित ढांचा अपेक्षा से अलग लग सकता है। इसका लाभ तभी मिलता है जब उपयोगकर्ता परिणामों को संदर्भ के साथ पढ़ने और आगे कार्रवाई करने के लिए तैयार हो।

NCERT द्वारा विकसित इस ऐप की पहुंच उल्लेखनीय है। इसे मुफ्त में इस्तेमाल किया जा सकता है और इसके एक मिलियन से अधिक इंस्टॉल हैं। इसकी औसत रेटिंग 3.9 है, जो बताती है कि उपयोगकर्ताओं का अनुभव एक जैसा नहीं रहा होगा; मेरे विचार में इसका कारण यही हो सकता है कि ऐप की उपयोगिता केवल इंटरफेस पर नहीं, बल्कि स्क्रीनिंग करने वाले व्यक्ति की तैयारी पर भी निर्भर करती है।

मेरी समावेशी राय

PRASHAST की सबसे बड़ी ताकत यह है कि यह स्कूलों को बच्चों की अलग-अलग जरूरतों पर शुरुआती और अधिक व्यवस्थित ढंग से सोचने का अवसर देता है। यह खास तौर पर तब उपयोगी है जब शिक्षक किसी व्यवहार को तुरंत “कमजोरी” कहने के बजाय यह पूछना चाहता है कि बच्चे को किस तरह का समर्थन चाहिए। अलग संचार शैली, मोटर कठिनाई, संवेदनशीलता और कक्षा की परिस्थिति को ध्यान में रखकर इस्तेमाल किया जाए तो इसका मूल्य बढ़ जाता है।

मेरी मुख्य सावधानी भी स्पष्ट है: इसे अंतिम फैसला, चिकित्सकीय निदान या बच्चे की स्थायी पहचान न बनाएं। शांत वातावरण, पर्याप्त समय, वैकल्पिक प्रतिक्रिया का सम्मान और शिक्षक के स्वतंत्र अवलोकन के बिना कोई भी डिजिटल स्क्रीनिंग अधूरी हो सकती है। यदि स्कूल इन बातों का ध्यान रखता है, तो ऐप कागजी अनुमान और जल्दबाजी वाले निष्कर्षों की तुलना में बेहतर शुरुआती ढांचा दे सकता है।

वर्तमान संस्करण 27.0.59 है और ऐप 4 सितम्बर 2022 को जारी किया गया था। मेरे लिए इसका सही मूल्य इस बात में नहीं है कि इसे कितने लोग डाउनलोड कर चुके हैं, बल्कि इसमें है कि स्कूल इसके संकेतों के बाद क्या करता है। PRASHAST को परिणाम बताने वाले ऐप की तरह नहीं, बच्चे को बेहतर समझने की शुरुआत की तरह इस्तेमाल करें। इसी सोच के साथ यह समावेशी शिक्षा के लिए एक उपयोगी मुफ्त साधन बनता है।

Unknown

PRASHAST क्या है और इसका उपयोग किस उद्देश्य से किया जाता है?

PRASHAST एक डिजिटल स्क्रीनिंग टूल है, जिसे विशेष आवश्यकता वाले बच्चों की शुरुआती पहचान और शैक्षिक सहायता से संबंधित जानकारी जुटाने के लिए उपयोग किया जाता है। इसमें शिक्षक, अभिभावक या संबंधित कर्मचारी बच्चे की क्षमताओं और संभावित कठिनाइयों से जुड़े प्रश्नों के उत्तर दर्ज कर सकते हैं। यह ऐप अंतिम चिकित्सकीय निदान नहीं देता, बल्कि आगे के मूल्यांकन और उचित सहायता की आवश्यकता समझने में मदद करता है।


क्या PRASHAST का उपयोग करने के लिए किसी विशेष तकनीकी ज्ञान या प्रशिक्षण की आवश्यकता होती है?

PRASHAST का इंटरफेस सामान्य उपयोगकर्ताओं को ध्यान में रखकर बनाया गया है, इसलिए इसे चलाने के लिए बहुत उन्नत तकनीकी ज्ञान आवश्यक नहीं होता। फिर भी, स्क्रीनिंग प्रश्नों को सही ढंग से समझना और बच्चे के व्यवहार या क्षमताओं का निष्पक्ष अवलोकन करना जरूरी है। विद्यालयी उपयोग के मामले में शिक्षकों या कर्मचारियों को ऐप की प्रक्रिया और उद्देश्य के बारे में प्रारंभिक मार्गदर्शन लेना अधिक उपयोगी रहेगा।


क्या PRASHAST बच्चे की विकलांगता या किसी स्वास्थ्य स्थिति का निश्चित निदान करता है?

नहीं, PRASHAST को निश्चित चिकित्सकीय या मनोवैज्ञानिक निदान देने वाला उपकरण नहीं समझना चाहिए। यह एक प्रारंभिक स्क्रीनिंग ऐप है, जो संभावित विकासात्मक, सीखने या कार्यात्मक कठिनाइयों के संकेतों को पहचानने में सहायता करता है। यदि परिणाम किसी चिंता की ओर संकेत करते हैं, तो अभिभावकों को योग्य डॉक्टर, मनोवैज्ञानिक, विशेष शिक्षक या संबंधित विशेषज्ञ से विस्तृत मूल्यांकन और सलाह लेनी चाहिए।


PRASHAST में दर्ज की गई जानकारी और बच्चे के व्यक्तिगत डेटा की सुरक्षा कैसे होती है?

PRASHAST में बच्चे से संबंधित जानकारी दर्ज करते समय गोपनीयता का विशेष ध्यान रखना चाहिए। ऐप डाउनलोड करने से पहले उसकी आधिकारिक गोपनीयता नीति, डेटा संग्रह, भंडारण और साझा करने से जुड़े नियम अवश्य पढ़ें। केवल आवश्यक जानकारी दर्ज करें, डिवाइस को सुरक्षित रखें और परिणामों को अनधिकृत लोगों के साथ साझा न करें। विद्यालय या संस्था के उपयोग में स्थानीय डेटा-सुरक्षा नियमों का पालन करना भी महत्वपूर्ण है।


क्या PRASHAST Android और iPhone दोनों पर उपलब्ध है, और इसे डाउनलोड करने से पहले किन बातों की जाँच करनी चाहिए?

PRASHAST की उपलब्धता डिवाइस, ऑपरेटिंग सिस्टम और आधिकारिक वितरण चैनल के अनुसार अलग हो सकती है। डाउनलोड करते समय केवल आधिकारिक Google Play Store, Apple App Store या संबंधित सरकारी स्रोत का उपयोग करें। ऐप का डेवलपर नाम, उपयोगकर्ता समीक्षाएँ, अंतिम अपडेट, आवश्यक अनुमतियाँ और संगत Android या iOS संस्करण जाँच लें। अनजान वेबसाइटों से APK या संदिग्ध फाइलें डाउनलोड करने से बचें।


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