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पक्ष

  • समाचारों के साथ गहन विश्लेषण और स्पष्ट संपादकीय दृष्टिकोण मिलता है।
  • भारतीय इतिहास
  • संस्कृति और राजनीति पर केंद्रित सामग्री उपयोगी है।
  • लेखों की भाषा सामान्यतः सहज और पढ़ने में आसान है।
  • नियमित अपडेट से राष्ट्रीय मुद्दों पर जानकारी बनी रहती है।
  • विचारपरक लेख और राय सामग्री पाठकों को अलग दृष्टिकोण देती है।

विपक्ष

  • कुछ लेखों में संपादकीय झुकाव अधिक महसूस हो सकता है।
  • ऐप में सामग्री की विविधता अन्य बड़े समाचार ऐप्स से कम है।
  • कई प्रीमियम लेखों के लिए सदस्यता की आवश्यकता पड़ सकती है।
  • ब्रेकिंग न्यूज़ कवरेज हमेशा तुरंत उपलब्ध नहीं होती।
  • कुछ डिवाइसों पर विज्ञापन और लोडिंग समय अनुभव प्रभावित कर सकते हैं।
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अगर आप समाचार और पत्रिकाओं की दुनिया में ऐसा मंच खोज रहे हैं जो भारतीय सार्वजनिक जीवन, विचारों और समसामयिक बहसों को एक खास वैचारिक दृष्टिकोण से पढ़ने देता हो, तो Swarajya आपके लिए दिलचस्प हो सकता है। मैंने इसे सामान्य सुर्खियां देखने वाले ऐप की तरह नहीं, बल्कि विचार-प्रधान सामग्री पढ़ने के लिए इस्तेमाल किया। मेरा अनुभव यह रहा कि इसकी उपयोगिता इस बात पर निर्भर करती है कि आप खबर से क्या चाहते हैं: तेज अपडेट, या किसी मुद्दे पर विस्तृत तर्क और संपादकीय नजरिया।

यह ऐप Kovai Media Private Limited ने विकसित किया है और इसे मुफ्त में इस्तेमाल किया जा सकता है। इसकी औसत रेटिंग 4.3 है, इसलिए नए उपयोगकर्ता के लिए यह शुरुआती भरोसे का संकेत जरूर देती है, हालांकि रेटिंग को अपने पढ़ने के स्वाद का विकल्प नहीं मानना चाहिए। इसे अब तक पचास हजार से अधिक बार इंस्टॉल किया जा चुका है, जिससे पता चलता है कि इसका अपना एक स्थिर पाठक वर्ग है।

पहली बार खोलने पर कहां अटक सकता है अनुभव

मेरे हिसाब से Swarajya को खोलते ही सबसे पहले यह समझना जरूरी है कि यह केवल “आज की बड़ी खबरें” दिखाने वाला साधारण समाचार ऐप नहीं है। इसका केंद्र समाचार, टिप्पणी और सार्वजनिक मुद्दों पर विचारपूर्ण सामग्री है। अगर आप हर कुछ मिनट में बदलती छोटी सुर्खियां, स्थानीय ट्रैफिक अपडेट या मौसम जैसी उपयोगिता चाहते हैं, तो यह ऐप आपकी पहली पसंद नहीं बनेगा।

नए उपयोगकर्ता अक्सर इसी अपेक्षा के कारण उलझते हैं। वे ऐप खोलकर तुरंत बहुत सारी छोटी खबरों की सूची खोजते हैं, जबकि यहां पढ़ने का आनंद किसी मुद्दे को संदर्भ के साथ समझने में है। इसलिए मेरी पहली सलाह है कि इसे त्वरित सूचना-स्रोत के बजाय संपादकीय और विश्लेषण पढ़ने का मंच मानकर शुरू करें। इससे शुरुआती अनुभव काफी साफ हो जाता है।

स्टोर पर इसका छोटा परिचय केवल “Swarajya” है, लेकिन ऐप की वास्तविक पहचान उसके विषयों और लेखन के स्वर से बनती है। मंच नए भारत की बहसों को एक उदारवादी अधिकार-केंद्रित दृष्टिकोण से देखने की कोशिश करता है। यह बात कुछ पाठकों को स्पष्ट और उपयोगी लगेगी, जबकि जो लोग पूरी तरह तटस्थ, केवल तथ्य-सूची जैसी प्रस्तुति चाहते हैं, उन्हें लेख पढ़ते समय अपने लिए दूसरे स्रोत भी साथ रखने चाहिए।

मैंने पाया कि किसी लेख को पढ़ने से पहले उसका शीर्षक ही नहीं, उसका विषय और लेखन का कोण भी देखना उपयोगी है। एक ही राजनीतिक या सामाजिक घटना को अलग-अलग प्रकाशन अलग ढंग से समझाते हैं। Swarajya का मूल्य तब अधिक दिखता है जब आप उसके लेख को अंतिम उत्तर मानने के बजाय किसी मुद्दे पर एक सुव्यवस्थित दृष्टिकोण के रूप में पढ़ते हैं। यही इसकी ताकत भी है और इसकी सीमा भी।

सेटअप के दौरान की जाने वाली सरल जांच

ऐप शुरू करने से पहले अपने फोन की संगतता देख लेना अच्छा रहेगा। यह Android 7.0 या उसके बाद के संस्करण पर चलता है। पुराने फोन पर ऐप खुल जाना और आराम से चलना दो अलग बातें हो सकती हैं, इसलिए अगर स्क्रीन देर से प्रतिक्रिया दे या सामग्री खुलने में समय लगे, तो तुरंत लेखों को दोष देने के बजाय फोन की खाली जगह, सिस्टम की स्थिति और इंटरनेट कनेक्शन जांचें।

पहली बार इस्तेमाल करते समय मैं उपयोगकर्ता को तीन छोटे परीक्षण करने की सलाह दूंगा। पहले ऐप खोलकर मुख्य सामग्री को सामान्य रूप से लोड होने दें। फिर एक लेख खोलें और कुछ देर पढ़ें। इसके बाद वापस जाकर दूसरा लेख खोलें। इस क्रम से पता चल जाता है कि समस्या पूरे ऐप में है या केवल किसी खास पेज को लोड करने में। बिना जांचे बार-बार ऐप बंद करना अक्सर समस्या को समझने में मदद नहीं करता।

कनेक्शन भी महत्वपूर्ण है। समाचार और पत्रिका सामग्री सामान्यतः दूरस्थ सर्वर से आती है, इसलिए कमजोर मोबाइल नेटवर्क में खाली जगह, अधूरा पेज या देर से खुलती सामग्री दिखाई दे सकती है। ऐसी स्थिति में पहले वाई-फाई और मोबाइल डेटा के बीच बदलकर देखें। अगर एक नेटवर्क पर लेख खुलता है और दूसरे पर नहीं, तो समस्या ऐप से अधिक नेटवर्क की हो सकती है।

एक और व्यावहारिक बात यह है कि ऐप को खोलते समय बहुत-सी दूसरी भारी प्रक्रियाएं बंद रखना मददगार हो सकता है, खासकर पुराने फोन में। बैकग्राउंड में वीडियो, बड़े डाउनलोड या कई खुले ऐप चल रहे हों तो समाचार ऐप का प्रदर्शन अस्थिर लग सकता है। मैं पहले एक साफ परीक्षण करता हूं: फोन को सामान्य स्थिति में रखकर Swarajya खोलता हूं, फिर उसी लेख को व्यस्त स्थिति में खोलकर तुलना करता हूं।

ऐप मुफ्त है, लेकिन इसमें प्रति आइटम दस रुपये से लेकर एक सौ निन्यानवे रुपये तक की इन-ऐप खरीदारी दिखाई देती है। इसलिए यदि किसी अतिरिक्त सामग्री या भुगतान वाले विकल्प का संकेत मिले, तो आगे बढ़ने से पहले स्क्रीन पर दिखाई गई जानकारी ध्यान से पढ़ें। केवल मुफ्त डाउनलोड होने का अर्थ यह नहीं कि ऐप के भीतर हर संभावित सामग्री या सुविधा बिना भुगतान के होगी।

पढ़ने का बेहतर तरीका और अटकने पर वापसी

मेरे लिए इसका सबसे अच्छा उपयोग एक तय पढ़ने की दिनचर्या में रहा। मैं इसे हर मिनट सूचना जांचने के बजाय दिन में एक या दो बार खोलता हूं, पहले उपलब्ध विषयों पर नजर डालता हूं और फिर केवल उन लेखों को चुनता हूं जिनमें मेरी वास्तविक रुचि है। इस तरीके से ऐप कम शोर वाला लगता है और लंबे लेखों पर ध्यान देना आसान होता है।

अगर कोई लेख बीच में खुलना बंद कर दे, तो पहले उसी पेज को दोबारा लोड करने के बजाय वापस सामग्री सूची पर जाएं और फिर लेख चुनें। इससे यह पता चलता है कि अटकाव केवल उस समय का था या लगातार बना हुआ है। अगर सूची भी सही से नहीं खुल रही, तो नेटवर्क जांचना अधिक तर्कसंगत कदम है।

कभी-कभी उपयोगकर्ता तुरंत ऐप का कैश साफ करने या उसे हटाकर फिर से स्थापित करने लगते हैं। यह अंतिम उपाय होना चाहिए, पहला नहीं। पहले ऐप बंद करके दोबारा खोलें, नेटवर्क बदलें और फोन को कुछ समय दें। अगर समस्या बनी रहे, तभी सिस्टम सेटिंग्स में ऐप की अस्थायी फाइलों से जुड़ी सामान्य सफाई पर विचार करें। सफाई से पहले यह ध्यान रखें कि किसी भी स्थानीय स्थिति या लॉगिन से जुड़ी चीज पर असर पड़ सकता है।

यदि कोई सामग्री दिखाई नहीं दे रही, तो यह जरूरी नहीं कि आपका फोन खराब है। कभी-कभी सामग्री का लोड होना नेटवर्क, सर्वर प्रतिक्रिया या अस्थायी तकनीकी स्थिति पर निर्भर करता है। मेरी व्यावहारिक पद्धति है कि उसी समय कोई दूसरा लेख खोलकर देखें। दूसरा लेख खुल जाए तो समस्या सीमित पेज की हो सकती है; कुछ भी न खुले तो कनेक्शन या ऐप की व्यापक स्थिति देखनी चाहिए।

लंबे लेख पढ़ने वालों के लिए फोन की स्क्रीन और टेक्स्ट आकार भी अनुभव बदलते हैं। बहुत छोटा टेक्स्ट आंखों पर दबाव डालता है, जबकि बहुत बड़ा आकार बार-बार स्क्रॉल करने को मजबूर कर सकता है। मैं सिस्टम के सामान्य डिस्प्ले आकार को पहले संतुलित रखता हूं और फिर पढ़ने की दूरी के अनुसार बदलता हूं। यह छोटा बदलाव किसी ऐप की सामग्री को अधिक आरामदेह बना सकता है, बिना ऐप के भीतर किसी विशेष सुविधा की जरूरत के।

रोजमर्रा के उपयोग में इसकी असली जगह

मान लीजिए आप सुबह काम पर जाने से पहले देश की राजनीति पर केवल पांच मिनट की सुर्खियां देखना चाहते हैं। उस स्थिति में यह ऐप कुछ ज्यादा विचार-प्रधान लग सकता है। लेकिन अगर शाम को आपके पास किसी नीति, चुनावी बहस या सामाजिक मुद्दे को समझने के लिए समय है, तो लेखों को आराम से पढ़ना अधिक संतोषजनक हो सकता है। मैं इसे उसी तरह इस्तेमाल करूंगा जैसे किसी पत्रिका का डिजिटल संस्करण पढ़ता हूं, न कि मैसेजिंग ऐप की तरह बार-बार खोलता रहूंगा।

छात्रों, प्रतियोगी परीक्षा की तैयारी करने वालों और सार्वजनिक मामलों में रुचि रखने वाले पाठकों को इससे तर्कों की भाषा समझने में मदद मिल सकती है। फिर भी किसी परीक्षा या शोध के लिए केवल एक वैचारिक मंच पर निर्भर रहना उचित नहीं होगा। मैं महत्वपूर्ण दावों को आधिकारिक दस्तावेजों, मूल रिपोर्टों और अलग विचारधारा वाले स्रोतों से मिलाकर देखूंगा। यह अतिरिक्त कदम लेख पढ़ने की उपयोगिता घटाता नहीं; बल्कि समझ को अधिक संतुलित बनाता है।

जो पाठक अंग्रेजी में विचार-पत्र, संपादकीय और राजनीतिक विश्लेषण पढ़ना पसंद करते हैं, उनके लिए इसका स्वर स्वाभाविक लग सकता है। दूसरी ओर, जो लोग केवल स्थानीय भाषा में समाचार चाहते हैं या बहुत छोटे, सीधे अपडेट पसंद करते हैं, उन्हें पढ़ने का अनुभव उतना सहज नहीं लगेगा। यहां चुनाव सामग्री की मात्रा से अधिक उसके दृष्टिकोण और प्रस्तुति का है।

मैंने इसे सामान्य समाचार एग्रीगेटर से अलग इसलिए पाया क्योंकि एग्रीगेटर अक्सर अलग-अलग स्रोतों की सुर्खियां एक जगह जमा करता है, जबकि Swarajya की पहचान एक संपादकीय आवाज से बनती है। एग्रीगेटर बेहतर है जब आपको एक घटना पर कई स्रोतों की तुलना करनी हो। Swarajya बेहतर है जब आप किसी मुद्दे पर एक स्पष्ट, लगातार दिखाई देने वाला नजरिया पढ़ना चाहते हैं। दोनों को साथ इस्तेमाल करना कई पाठकों के लिए सबसे समझदार तरीका हो सकता है।

कहां यह ऐप कारण नहीं होता

अगर ऐप खुलते ही बंद हो जाए, तो यह केवल सामग्री या सर्वर की समस्या नहीं मानी जा सकती। फोन की मेमोरी, सिस्टम अपडेट, बैकग्राउंड ऐप और अस्थिर डिवाइस प्रदर्शन भी जिम्मेदार हो सकते हैं। ऐसे में दूसरे हल्के ऐप खोलकर देखें। अगर वे भी असामान्य व्यवहार कर रहे हैं, तो ध्यान Swarajya से हटाकर फोन की सामान्य स्थिति पर देना चाहिए।

इसी तरह, लेख पढ़ते समय आंखों में थकान हो तो इसे केवल टेक्स्ट की समस्या न मानें। लंबे समय तक चमकदार स्क्रीन देखना, बहुत छोटा अक्षर या अंधेरे कमरे में पढ़ना भी कारण हो सकता है। मैं स्क्रीन की चमक को कमरे के अनुसार रखता हूं, छोटे सत्रों में पढ़ता हूं और लंबे लेख के बीच थोड़ी देर रुकता हूं। समाचार ऐप को लगातार चलाना जरूरी नहीं है।

यदि किसी मुद्दे पर लेख का दृष्टिकोण आपको एकतरफा लगता है, तो यह तकनीकी खराबी नहीं है। मंच की संपादकीय पहचान ही एक खास वैचारिक दिशा से जुड़ी है। ऐसे पाठक जो हर विषय पर समान दूरी वाली प्रस्तुति चाहते हैं, उन्हें अलग प्रकाशनों के लेख साथ पढ़ने चाहिए। यहां असहमति का समाधान ऐप को बार-बार रीफ्रेश करना नहीं, बल्कि स्रोतों की तुलना करना है।

रेटिंग और उपयोगकर्ता प्रतिक्रिया किसी ऐप की सामान्य छवि समझने में मदद करते हैं, लेकिन वे आपके फोन, नेटवर्क और पढ़ने की आदत का परिणाम नहीं बताते। Swarajya को लेकर 2.6 हजार से अधिक रेटिंग और 909 से अधिक समीक्षाएं हैं। मैं इन्हें संकेत के रूप में देखूंगा, निर्णायक प्रमाण के रूप में नहीं। किसी भी ऐप को अपने डिवाइस पर कुछ समय इस्तेमाल करके ही सही तरह परखा जा सकता है।

किसके लिए सही, किसे दूसरा विकल्प चुनना चाहिए

यह ऐप उन पाठकों के लिए अच्छा विकल्प है जो समाचार के साथ संपादकीय संदर्भ चाहते हैं, भारतीय राजनीति और समाज पर वैचारिक लेख पढ़ना पसंद करते हैं, और किसी मुद्दे को केवल शीर्षक से आगे समझने के लिए समय निकालते हैं। मुफ्त उपलब्धता इसे आजमाने में आसान बनाती है, जबकि 3+ आयु रेटिंग इसे सामान्य दर्शकों के लिए उपयुक्त श्रेणी में रखती है। फिर भी उम्र की रेटिंग को विषय-वस्तु की व्यक्तिगत पसंद का विकल्प नहीं समझना चाहिए।

जो लोग ब्रेकिंग न्यूज, स्थानीय घटनाओं, खेल के त्वरित स्कोर या अत्यंत संक्षिप्त अपडेट चाहते हैं, वे समाचार एग्रीगेटर या विशेष विषय वाले ऐप से अधिक संतुष्ट हो सकते हैं। इसी तरह, जो पाठक केवल निष्पक्ष समाचार-सार चाहते हैं और टिप्पणी से बचना चाहते हैं, उन्हें यहां हर लेख अपनी अपेक्षा के अनुरूप नहीं लगेगा। यह कमी नहीं, बल्कि इसके संपादकीय प्रारूप का स्वाभाविक परिणाम है।

मेरे लिए सबसे व्यावहारिक तरीका यह होगा कि इसे एकमात्र समाचार स्रोत न बनाकर अपने पढ़ने के मिश्रण का हिस्सा रखा जाए। पहले यहां किसी विषय पर विश्लेषण पढ़ें, फिर दूसरे स्रोत से तथ्य और विरोधी दृष्टिकोण जांचें। इस workflow से ऐप की वैचारिक स्पष्टता उपयोगी बनती है, लेकिन वह आपकी पूरी सूचना-दुनिया पर हावी नहीं होती।

तकनीकी रूप से शुरुआत करने वाले उपयोगकर्ताओं के लिए मेरी सलाह सरल है: Android संस्करण जांचें, पहली बार स्थिर नेटवर्क पर सामग्री खोलें, एक लेख पूरा लोड होने दें और फिर सामान्य पढ़ने की आदत बनाएं। समस्या आए तो नेटवर्क और फोन की स्थिति को ऐप से अलग करके जांचें। भुगतान से जुड़ा कोई विकल्प दिखे तो उसे ध्यान से पढ़कर ही आगे बढ़ें। ये छोटे कदम बेवजह की निराशा कम करते हैं।

अंतिम फैसला: विचार पढ़ने के लिए उपयोगी, त्वरित खबरों के लिए नहीं

Swarajya को इस्तेमाल करने के बाद मेरी राय संतुलित रूप से सकारात्मक है। मुझे इसकी सबसे बड़ी खूबी यह लगी कि यह पाठक को केवल सूचना की गति नहीं, बल्कि किसी विषय पर ठहरकर सोचने का अवसर देता है। इसकी सबसे बड़ी सीमा यही है कि इसका वैचारिक स्वर हर पाठक को समान रूप से सहज नहीं लगेगा और यह त्वरित, सर्व-विषयक समाचार फीड का सीधा विकल्प नहीं है।

संस्करण 4.9.15 के साथ यह Android 7.0 या बाद वाले फोन पर आजमाया जा सकता है। अगर आप समाचार और पत्रिकाओं की सामग्री को संपादकीय नजरिए के साथ पढ़ना चाहते हैं, तो मुफ्त में इसे शुरू करना उचित है। लेकिन डाउनलोड करने से पहले अपनी प्राथमिकता साफ रखें: क्या आपको तेज सुर्खियां चाहिए या मुद्दों पर तर्कपूर्ण लेख? पहले विकल्प के लिए दूसरा ऐप बेहतर हो सकता है; दूसरे के लिए Swarajya को अपनी पढ़ने की सूची में शामिल करना समझदारी है

अंततः मैं इसे उन दोस्तों को सुझाऊंगा जो भारतीय सार्वजनिक जीवन पर गंभीर लेख पढ़ते हैं और अलग-अलग स्रोतों की तुलना करने में रुचि रखते हैं। मैं इसे ऐसे व्यक्ति को नहीं सुझाऊंगा जिसे हर खबर बिना संपादकीय कोण के, बहुत छोटे रूप में और तुरंत चाहिए। सही अपेक्षा के साथ इस्तेमाल करने पर यह एक उपयोगी विचार-पत्रिका ऐप बनता है; गलत अपेक्षा के साथ वही ऐप धीमा, लंबा या एकतरफा महसूस हो सकता है।

Unknown

Swarajya ऐप क्या है और इसमें किस तरह की सामग्री मिलती है?

Swarajya एक डिजिटल न्यूज़ और विचार-पत्रिका ऐप है, जिसमें भारत से जुड़े राजनीति, अर्थव्यवस्था, समाज, संस्कृति, इतिहास और राष्ट्रीय मुद्दों पर लेख प्रकाशित किए जाते हैं। ऐप का मुख्य फोकस विश्लेषणात्मक और राय-आधारित सामग्री पर रहता है, इसलिए यह केवल ताज़ा सुर्खियाँ पढ़ने के बजाय किसी विषय की पृष्ठभूमि और अलग-अलग दृष्टिकोण समझने वाले पाठकों के लिए अधिक उपयोगी हो सकता है।


क्या Swarajya ऐप निःशुल्क डाउनलोड और उपयोग किया जा सकता है?

Swarajya ऐप आम तौर पर निःशुल्क डाउनलोड किया जा सकता है, लेकिन इसमें उपलब्ध सभी लेख या प्रीमियम सामग्री बिना किसी सीमा के मुफ्त हों, यह जरूरी नहीं है। कुछ सुविधाओं या विशेष लेखों के लिए सदस्यता, लॉगिन अथवा भुगतान की आवश्यकता हो सकती है। डाउनलोड करने से पहले ऐप स्टोर में दिए गए मौजूदा सब्सक्रिप्शन विकल्प, कीमत, नवीनीकरण नियम और क्षेत्रीय उपलब्धता अवश्य जांच लें।


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