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खूबियाँ

  • वाहन के OBD कोड पढ़ने और हटाने में मदद करता है।
  • कोडिंग विकल्पों से कार की कुछ सुविधाएँ अनुकूलित की जा सकती हैं।
  • समर्थित मॉडलों के लिए उपयोगी तकनीकी जानकारी उपलब्ध कराता है।
  • इंटरफ़ेस अपेक्षाकृत सरल है और शुरुआती उपयोगकर्ता भी समझ सकते हैं।
  • वर्कशॉप जाने से पहले संभावित समस्या की प्रारंभिक जाँच हो जाती है।

कमियाँ

  • सभी कार ब्रांड और मॉडलों के साथ संगतता उपलब्ध नहीं है।
  • गलत कोडिंग से वाहन के इलेक्ट्रॉनिक सिस्टम में समस्या आ सकती है।
  • OBD अडैप्टर अलग से खरीदना पड़ सकता है।
  • कुछ सुविधाएँ या वाहन प्रोफाइल भुगतान के बाद ही मिल सकते हैं।
  • कोड हटाने से वास्तविक खराबी ठीक नहीं होती
  • केवल चेतावनी छिप सकती है।
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OBD Coding Pro की समीक्षा Appcracy

अगर आप कार की डायग्नोस्टिक जानकारी और OBD कोडिंग को फोन से संभालना चाहते हैं, तो OBD Coding Pro पहली नज़र में एक सीधा विकल्प लगता है। यह ऑटो और वाहन श्रेणी का ऐप है, जिसे Basic connect ltd ने बनाया है। मैंने इसे ऐसे उपयोगकर्ता के नजरिए से देखा जो अपनी कार में चेतावनी लाइट आने पर तुरंत कारण समझना चाहता है, लेकिन हर छोटी समस्या के लिए वर्कशॉप नहीं जाना चाहता। मेरा शुरुआती निष्कर्ष यह है कि ऐप की उपयोगिता केवल इंस्टॉल करने से नहीं, बल्कि सही OBD यूनिट, सही वाहन-संगतता और धैर्य से किए गए सेटअप पर निर्भर करती है।

ऐप मुफ्त डाउनलोड के रूप में उपलब्ध है, हालांकि इसमें अलग-अलग इन-ऐप खरीदारी ₹75 से ₹26,000 प्रति आइटम तक दिखाई देती हैं। इसलिए इसे पूरी तरह बिना खर्च वाला पेशेवर समाधान मानना ठीक नहीं होगा। इसका स्टोर सारांश OBD कोडिंग और ऐप के साथ OBD यूनिट के इस्तेमाल पर केंद्रित है, यानी यह सामान्य कार-समाचार या ईंधन-खर्च ट्रैकर नहीं है। इसका उद्देश्य वाहन के इलेक्ट्रॉनिक सिस्टम के साथ काम करना है, और यही बात इसे साधारण ऑटो ऐप्स से अलग बनाती है।

जहां उपयोगकर्ता सबसे पहले अटकते हैं

ऐसे ऐप में सबसे आम उलझन ऐप खोलने के बाद नहीं, उससे पहले शुरू होती है: क्या आपके पास सही OBD यूनिट है और क्या वह आपकी कार के साथ काम करेगी? फोन में ऐप मौजूद होने से अपने-आप वाहन से संपर्क नहीं बनता। OBD पोर्ट, यूनिट, फोन का कनेक्शन और कार का इग्निशन—इन सभी कड़ियों का ठीक होना जरूरी है। अगर इनमें से एक भी हिस्सा गलत हो, तो उपयोगकर्ता अक्सर ऐप को दोष देता है, जबकि असली अड़चन हार्डवेयर या वाहन-संगतता में हो सकती है।

मेरी सलाह है कि पहली कोशिश में कोडिंग बदलने के बजाय केवल कनेक्शन और पढ़ने की प्रक्रिया समझें। कार को सुरक्षित जगह पर खड़ा करें, इंजन बंद रखें और इग्निशन की स्थिति को ऐप या यूनिट की जरूरत के अनुसार रखें। चलते वाहन में फोन देखकर सेटिंग बदलना न तो सुरक्षित है और न ही समझदारी। पहला लक्ष्य बदलाव करना नहीं, स्थिर कनेक्शन साबित करना होना चाहिए।

OBD पोर्ट भी हर कार में एक ही जगह नहीं होता। कई वाहनों में यह स्टीयरिंग के नीचे होता है, लेकिन अलग मॉडल में स्थान बदल सकता है। यूनिट को आधा लगा छोड़ना, ढीला कनेक्टर इस्तेमाल करना या पोर्ट के आसपास पहले से लगे किसी अडैप्टर को हटाए बिना नई यूनिट लगाना कनेक्शन को प्रभावित कर सकता है। इस तरह की छोटी भौतिक समस्या ऐप में खाली स्क्रीन, असफल पढ़ाई या बार-बार डिस्कनेक्शन के रूप में दिख सकती है।

एक और व्यावहारिक अड़चन यह है कि उपयोगकर्ता अक्सर सामान्य OBD स्कैनिंग और कोडिंग को एक ही काम समझ लेते हैं। गलती का कोड पढ़ना अपेक्षाकृत कम जोखिम वाला शुरुआती कदम हो सकता है, जबकि किसी वाहन सेटिंग को बदलना अलग स्तर का काम है। हर चेतावनी कोड का मतलब सीधे किसी एक पुर्जे को बदलना नहीं होता। कोडिंग से पहले यह समझना जरूरी है कि आप रीडिंग देख रहे हैं, कोई विकल्प बदल रहे हैं या किसी मॉड्यूल के व्यवहार में हस्तक्षेप कर रहे हैं।

ऐप खोलने से पहले की छोटी तैयारी

मैं उपयोगकर्ता को सलाह दूंगा कि वह कार का मॉडल, वर्ष और इंजन या इलेक्ट्रॉनिक सिस्टम से जुड़ी मूल जानकारी अपने पास रखे। ऐप में वाहन चुनने की प्रक्रिया हो सकती है, लेकिन सही पहचान के लिए यह जानकारी फिर भी उपयोगी रहती है। गलत वाहन प्रोफाइल चुनकर आगे बढ़ने से दिखाई देने वाले विकल्प भ्रमित कर सकते हैं और उपयोगकर्ता को यह लग सकता है कि ऐप काम नहीं कर रहा।

फोन की बैटरी भी नजरअंदाज करने वाली चीज नहीं है। कोडिंग या किसी इलेक्ट्रॉनिक प्रक्रिया के दौरान फोन बंद हो जाए तो काम बीच में रुक सकता है। इसी तरह कार की बैटरी कमजोर हो तो संचार अस्थिर हो सकता है। यहां एक महत्वपूर्ण फर्क है: ऐप की स्क्रीन पर कनेक्शन दिखना और वाहन की विद्युत स्थिति पर्याप्त होना दो अलग बातें हैं। खासकर पुरानी या लंबे समय से खड़ी कार में पहले बैटरी की हालत देखना बेहतर है।

कनेक्शन जांचने का क्रम

सेटअप करते समय मैं यह क्रम अपनाऊंगा: पहले OBD यूनिट को पोर्ट में ठीक से लगाना, फिर फोन पर उपलब्ध कनेक्शन विकल्प देखना, उसके बाद कार को आवश्यक इग्निशन स्थिति में रखना और अंत में ऐप में वाहन या कनेक्शन प्रक्रिया शुरू करना। एक साथ कई बार यूनिट निकालना-लगाना और ऐप बंद-खोलना समस्या को समझने के बजाय और उलझा सकता है। हर चरण के बाद कुछ क्षण रुककर प्रतिक्रिया देखना अधिक उपयोगी है।

अगर फोन यूनिट को देखता है लेकिन ऐप वाहन से डेटा नहीं पढ़ पाता, तो समस्या फोन और यूनिट के बीच नहीं, यूनिट और कार के बीच हो सकती है। इसके विपरीत, अगर यूनिट का कोई संकेत ही नहीं मिलता, तो पोर्ट, यूनिट या फोन कनेक्शन की जांच पहले करनी चाहिए। यह अलगाव करने की आदत समय बचाती है, क्योंकि हर असफलता का समाधान ऐप को दोबारा इंस्टॉल करना नहीं होता।

सेटअप के बाद सुरक्षित और समझदार कार्यप्रवाह

जब कनेक्शन बन जाए, तब भी सीधे कोडिंग विकल्पों में जाना मेरी नजर में सही तरीका नहीं है। पहले उपलब्ध जानकारी पढ़ें और उसे नोट कर लें। यदि कोई चेतावनी कोड दिखता है, तो उसे मिटाने से पहले उसका विवरण लिख लेना उपयोगी है। कोड मिटाने से डैशबोर्ड की लाइट अस्थायी रूप से बंद हो सकती है, लेकिन अगर मूल समस्या बनी हुई है तो वह फिर लौट सकती है। इसलिए “लाइट बंद हो गई” को “समस्या ठीक हो गई” समझना खतरनाक निष्कर्ष है।

किसी सेटिंग में बदलाव करने से पहले उसकी मौजूदा स्थिति दर्ज करें। स्क्रीनशॉट, लिखित नोट या फोन में साधारण टिप्पणी पर्याप्त है। यह खास तौर पर तब मदद करता है जब नया विकल्प अपेक्षित परिणाम न दे। बदलाव एक-एक करके करना भी जरूरी है। एक साथ कई सेटिंग बदलने पर बाद में यह पता लगाना मुश्किल हो जाता है कि किस बदलाव से लाभ या परेशानी हुई।

इस ऐप का व्यावहारिक लाभ उन लोगों के लिए अधिक हो सकता है जो अपनी कार को समझने में रुचि रखते हैं और छोटे इलेक्ट्रॉनिक बदलावों को सावधानी से जांचना चाहते हैं। उदाहरण के लिए, कोई उपयोगकर्ता सप्ताहांत में अपनी कार की चेतावनी लाइट की प्रारंभिक जांच कर सकता है, कोड लिख सकता है और फिर मैकेनिक को अधिक स्पष्ट जानकारी दे सकता है। इससे वर्कशॉप में बातचीत अनुमान के बजाय उपलब्ध रीडिंग पर आधारित हो सकती है।

लेकिन मैं इसे हर समस्या का घरेलू इलाज नहीं मानूंगा। एयरबैग, ब्रेक, स्टीयरिंग, इंजन ओवरहीटिंग या ईंधन की गंध जैसी गंभीर स्थिति में ऐप से कोड पढ़ना केवल जानकारी जुटाने का कदम हो सकता है, मरम्मत का विकल्प नहीं। ऐसी स्थिति में वाहन चलाना रोकना और योग्य तकनीशियन से जांच कराना बेहतर है। फोन पर कोई कोड न दिखने का मतलब यह भी नहीं कि वाहन पूरी तरह सुरक्षित है।

एक वास्तविक दैनिक उपयोग का उदाहरण

मान लीजिए सुबह काम पर निकलते समय इंजन चेतावनी लाइट दिखाई देती है, लेकिन कार सामान्य रूप से चल रही है। मैं पहले सुरक्षित स्थान पर रुककर लाइट को नोट करूंगा, फिर OBD यूनिट लगाकर ऐप से रीडिंग लेने की कोशिश करूंगा। जो कोड मिले, उसे तुरंत मिटाने के बजाय लिखूंगा। अगर कोड किसी ऐसे सिस्टम से जुड़ा हो जिसे मैं नहीं समझता, तो उसी जानकारी के साथ सर्विस सेंटर जाना अधिक समझदारी होगी।

अगर पढ़ाई शुरू ही नहीं होती, तो मैं पहले यूनिट का कनेक्शन, इग्निशन स्थिति और कार की बैटरी देखूंगा। उसके बाद फोन का कनेक्शन दोबारा जांचूंगा। इस क्रम का फायदा यह है कि मैं बिना वजह कोड मिटाने, ऐप हटाने या कार की सेटिंग बदलने से बचता हूं। यही वह जगह है जहां ऐप का असली मूल्य केवल एक बटन दबाने में नहीं, बल्कि समस्या को व्यवस्थित ढंग से अलग करने में दिखाई देता है।

जब प्रक्रिया बीच में रुक जाए

कभी-कभी कनेक्शन बनने के बाद ऐप प्रतिक्रिया देना बंद कर सकता है या पढ़ाई अधूरी रह सकती है। ऐसी स्थिति में सबसे सुरक्षित सामान्य कदम है कि कोई बदलाव सेव करने की कोशिश न करें, प्रक्रिया को शांतिपूर्वक रोकें और वाहन की स्थिति स्थिर रखें। यूनिट को तुरंत खींचने के बजाय ऐप की मौजूदा स्क्रीन देखें; यदि कोई स्पष्ट समाप्ति या बाहर निकलने का विकल्प हो तो पहले वही इस्तेमाल करें।

इसके बाद फोन और OBD यूनिट के बीच कनेक्शन को फिर से शुरू किया जा सकता है। लेकिन हर बार असफल होने पर लगातार दोहराने के बजाय कारण बदलकर जांचें: क्या कार की इग्निशन स्थिति वही है, क्या यूनिट ठीक से लगी है, क्या फोन बहुत दूर है, क्या बैटरी कमजोर है? यदि केवल एक खास वाहन पर समस्या आती है, तो वाहन-संगतता पर संदेह बढ़ता है। यदि कई वाहनों पर भी वही समस्या हो, तो यूनिट या कनेक्शन व्यवस्था अधिक संभावित कारण बनती है।

कोडिंग के दौरान धैर्य विशेष रूप से जरूरी है। उपयोगकर्ता को स्क्रीन पर तुरंत बदलाव न दिखे तो वह बार-बार कमांड भेज सकता है, लेकिन इससे स्थिति स्पष्ट नहीं होती। एक आदेश के बाद परिणाम की जांच करें और फिर अगला कदम लें। यह धीमा तरीका लगता है, पर इलेक्ट्रॉनिक मॉड्यूल के साथ काम करते समय जल्दबाजी से बेहतर है।

ऐप दोषी न हो तो क्या देखें

हर असफल कनेक्शन को ऐप की खराबी कहना आसान है, लेकिन कई बाहरी कारण हो सकते हैं। OBD पोर्ट में धूल, ढीला संपर्क, खराब यूनिट, कमजोर कार बैटरी या गलत वाहन चयन—इनमें से कोई भी ऐप को दोषी जैसा दिखा सकता है। यदि फोन पर दूसरी कनेक्टिविटी गतिविधियां ठीक चल रही हैं, फिर भी यूनिट से संपर्क नहीं बनता, तो यूनिट और पोर्ट की जांच अधिक तर्कसंगत है।

कार की इलेक्ट्रॉनिक संरचना भी निर्णायक हो सकती है। एक ही ब्रांड के अलग मॉडल या अलग निर्माण अवधि में उपलब्ध मॉड्यूल और समर्थित विकल्प अलग हो सकते हैं। इसलिए किसी दूसरे वाहन पर काम कर चुका विकल्प आपकी कार में दिखाई दे, यह जरूरी नहीं। यही कारण है कि मैं इंटरनेट पर मिले किसी अनजान कोडिंग निर्देश को बिना समझे लागू करने के बजाय पहले वाहन की पहचान और मौजूदा स्थिति दर्ज करने को प्राथमिकता दूंगा।

ऐप का वर्तमान संस्करण 8.0.1 है और यह Android 5.1 या उसके बाद के सिस्टम पर चलने के लिए बनाया गया है। पुराने फोन पर ऐप खुल जाना और OBD संचार सही चलना एक ही बात नहीं है। अगर फोन बहुत पुराना है, तो कनेक्शन स्थिरता, बैकग्राउंड प्रक्रिया या स्क्रीन प्रतिक्रिया प्रभावित हो सकती है। दूसरी ओर, नए फोन पर भी समस्या हो सकती है यदि OBD यूनिट का कनेक्शन तरीका उसके साथ मेल न खाए।

किसके लिए यह उपयोगी है, और किसे दूसरा रास्ता चुनना चाहिए

यह ऐप उन कार मालिकों के लिए अच्छा शुरुआती औजार हो सकता है जो अपने वाहन की डायग्नोस्टिक जानकारी को समझना चाहते हैं, OBD यूनिट के साथ प्रयोग करने में सहज हैं और बदलाव से पहले नोट्स रखने की आदत बना सकते हैं। छोटे गैर-आपातकालीन मामलों में यह मैकेनिक से बात करने के लिए बेहतर संदर्भ दे सकता है। ऑटो इलेक्ट्रॉनिक्स सीखने वाले उपयोगकर्ता भी इसके माध्यम से वाहन और फोन के बीच काम करने वाली प्रक्रिया को समझ सकते हैं।

इसके विपरीत, अगर आप केवल चेतावनी लाइट बंद करने के लिए एक टैप वाला समाधान चाहते हैं, तो यह सही चुनाव नहीं हो सकता। जिन लोगों के पास OBD यूनिट नहीं है, वे केवल ऐप इंस्टॉल करके इसका पूरा लाभ नहीं उठा पाएंगे। और अगर आपका मुख्य उद्देश्य नियमित सर्विस रिमाइंडर, ईंधन लॉग या यात्रा रिकॉर्ड रखना है, तो सामान्य कार-मैनेजमेंट ऐप अधिक सुविधाजनक हो सकता है। वर्कशॉप स्तर की गहरी जांच के लिए पेशेवर स्कैनर और प्रशिक्षित तकनीशियन बेहतर विकल्प रहेंगे।

उपयोग की लागत को भी पहले समझ लें। ऐप मुफ्त है, लेकिन इन-ऐप खरीदारी ₹75 से ₹26,000 प्रति आइटम तक हो सकती है। यह बड़ा अंतर बताता है कि भुगतान करने से पहले किसी विकल्प का उद्देश्य और आपकी वास्तविक जरूरत साफ होनी चाहिए। केवल इसलिए खरीदना उचित नहीं कि कोई सेटिंग दिखाई दे रही है। पहले यह तय करें कि वह आपकी कार के लिए प्रासंगिक है, फिर संभावित लाभ और जोखिम पर विचार करें।

मेरी अंतिम राय

OBD Coding Pro को मैं “सही उपकरण और सही अपेक्षा वाले उपयोगकर्ता” के लिए उपयोगी ऐप मानता हूं। Basic connect ltd का यह ऑटो और वाहन ऐप सामान्य ड्राइविंग साथी नहीं है; इसकी उपयोगिता OBD यूनिट, फोन और वाहन के बीच सही तालमेल पर टिकी है। दस हजार से अधिक इंस्टॉल और तीन वर्ष से अधिक उम्र के ऐप के रूप में यह पूरी तरह नया प्रयोग नहीं लगता, लेकिन इसका अनुभव हर वाहन पर एक जैसा होगा, ऐसा मानना उचित नहीं है।

मुझे इसका सबसे मजबूत पक्ष यह लगता है कि यह उपयोगकर्ता को कार की इलेक्ट्रॉनिक जानकारी के करीब लाने की कोशिश करता है। सबसे बड़ी सीमा यह है कि इसकी सफलता ऐप से उतनी ही जुड़ी है जितनी हार्डवेयर, वाहन-संगतता और उपयोगकर्ता की सावधानी से। सेटअप से पहले यूनिट और कार की जांच करें, पहले रीडिंग लें, बदलावों का रिकॉर्ड रखें और सुरक्षा से जुड़े मामलों में इसे मरम्मत का विकल्प न बनाएं। तीन वर्ष और उससे ऊपर के उपयोगकर्ताओं के लिए रेट किया गया यह ऐप तकनीकी रुचि रखने वाले वयस्क कार मालिकों के लिए अधिक उपयुक्त है, न कि ऐसे व्यक्ति के लिए जो बिना किसी तैयारी के तुरंत कोडिंग करना चाहता है।

मेरे हिसाब से इसे डाउनलोड करने का निर्णय तभी अच्छा है जब आपके पास संगत OBD यूनिट हो और आप समस्या को चरण-दर-चरण जांचने के लिए तैयार हों। अगर आप इस प्रक्रिया को समझकर इस्तेमाल करेंगे, तो यह सर्विस सेंटर जाने से पहले उपयोगी जानकारी दे सकता है। अगर आप केवल एक सरल, जोखिम-मुक्त और सार्वभौमिक समाधान चाहते हैं, तो पेशेवर जांच या अधिक सीमित लेकिन आसान डायग्नोस्टिक विकल्प आपके लिए बेहतर रहेंगे।

FAQ

OBD Coding Pro क्या है और यह किस काम आता है?

OBD Coding Pro एक वाहन डायग्नोस्टिक और कोडिंग ऐप है, जो समर्थित कारों के इलेक्ट्रॉनिक कंट्रोल मॉड्यूल से जुड़कर फॉल्ट कोड पढ़ने, कुछ कोड हटाने और उपलब्ध सुविधाओं को कॉन्फ़िगर करने में मदद कर सकता है। इसका उपयोग आमतौर पर OBD-II एडाप्टर के साथ किया जाता है। ऐप डाउनलोड करने से पहले अपने वाहन के मेक, मॉडल, वर्ष और मॉड्यूल की संगतता अवश्य जांचें।


क्या OBD Coding Pro सभी कारों और OBD-II एडाप्टर के साथ काम करता है?

नहीं, OBD Coding Pro की कार्यक्षमता कार के ब्रांड, मॉडल, निर्माण-वर्ष, ECU मॉड्यूल और इस्तेमाल किए गए OBD-II एडाप्टर पर निर्भर करती है। केवल OBD-II पोर्ट होना पर्याप्त नहीं है, क्योंकि कुछ कोडिंग सुविधाओं के लिए विशेष प्रोटोकॉल या समर्थित हार्डवेयर चाहिए। खरीद या डाउनलोड से पहले ऐप की संगतता सूची, आवश्यक एडाप्टर और अपने वाहन के सपोर्ट की पुष्टि करें।


OBD Coding Pro इस्तेमाल करने के लिए कौन-सा हार्डवेयर और कनेक्शन चाहिए?

आमतौर पर इस तरह के ऐप के लिए वाहन के OBD-II पोर्ट में लगाया जाने वाला संगत Bluetooth, Wi-Fi या USB डायग्नोस्टिक एडाप्टर आवश्यक होता है। फोन में Bluetooth या Wi-Fi अनुमति, स्थिर बैटरी और ऐप को जरूरी परमिशन देना पड़ सकता है। गलत या सस्ता एडाप्टर कनेक्शन टूटने, गलत डेटा दिखाने या कोडिंग प्रक्रिया में समस्या पैदा कर सकता है।


क्या OBD Coding Pro से कार की छिपी हुई सुविधाएं सक्रिय करना सुरक्षित है?

कोडिंग से कुछ सुविधा विकल्प बदले जा सकते हैं, लेकिन यह प्रक्रिया पूरी तरह जोखिम-मुक्त नहीं है। गलत मॉड्यूल, गलत पैरामीटर या बीच में बिजली कटने से चेतावनी लाइट, संचार समस्या या वाहन के किसी सिस्टम में खराबी आ सकती है। कोडिंग से पहले मूल सेटिंग का बैकअप लें, इंजन या बैटरी की स्थिति ठीक रखें और अनजान विकल्पों को बदलने के बजाय प्रशिक्षित तकनीशियन की सहायता लें।


क्या OBD Coding Pro से फॉल्ट कोड मिटाने से वाहन की समस्या ठीक हो जाती है?

ऐप से डायग्नोस्टिक ट्रबल कोड मिटाया जा सकता है, लेकिन कोड हटना समस्या का समाधान नहीं होता। यदि वास्तविक खराबी मौजूद है, तो चेतावनी लाइट दोबारा आ सकती है या वाहन की सुरक्षा और प्रदर्शन प्रभावित हो सकता है। कोड मिटाने से पहले उसका विवरण और फ्रीज़-फ्रेम डेटा नोट करें, कारण की जांच कराएं और एयरबैग, ब्रेक या इंजन जैसे महत्वपूर्ण सिस्टम में पेशेवर सलाह के बिना बदलाव न करें।


अन्य भाषाओं में उपलब्ध

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